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अखबारी लाल का चश्मा : समाचारों में गलत तथ्यों का हो रहा है समावेश


अखबारी लाल
जय हो अखबारी लाल की। जिसने आज अखबारों में प्रकाशित समाचारों में गलत तथ्यों के समावेश को उजागर कर ही डाला। अखबारी लाल के अनुसार 3 सितंबर के हिंदुस्तान और प्रभात खबर अखबारों में छपी खबर के अनुसार नवगछिया अनुमंडल मुख्यालय पर प्रदर्शन करने वाले लोग कोसी नदी की बाढ़ से प्रभावित थे। जो बिहपुर प्रखंड अंतर्गत गोविंदपुर, बड़ी खाल, आहुति इत्यादि इलाकों के थे। ये सारा क्षेत्र कोसी नदी के किनारे पड़ता है। देश के नम्बर वन कहे जाने वाले अखबार दैनिक जागरण ने भी इस मामले की खबर को पेज नम्बर छह पर प्रकाशित किया है। लेकिन इस खबर में इन बाढ़ पीड़ितों को गंगा की बाढ़ से प्रभावित बताया गया है। जिसे एक बाढ़ पीड़ित का ही बयान बना दिया गया है। भला जो रोज कोसी के किनारे रहने वाला है वह गंगा के किनारे रहने वाला कैसे बन गया। क्या कोसी और गंगा में कोई अंतर है ही नहीं।
और तो और खबर के शीर्षक में तथा फोटो के नीचे प्रदर्शन बताया गया है। लेकिन समाचार में धरना लिखा गया है। लगता है कि धरना और प्रदर्शन का मतलब एक ही होता है। इस अखबार की नजर में हो सकता है। लेकिन दोनों के मतलब अलग अलग होते हैं।
इसी अखबार में इस खबर से ऊपर खबर छपी है “हिरासत में लिए गए पिकअप वैन चालक” शीर्षक पढ़कर तो लगा कि कई पिकअप के वैन चालक को हिरासत में लिया गया। लेकिन खबर पढ़ने से पता चला कि मात्र एक ही चालक को हिरासत में लिया गया है। अब मजे की बात यह है कि यह खबर भी अन्य सभी अखबारों में छपी है। जिसमें स्पष्ट है कि चालक भागने में सफल रहा। जो बारसोई का रहने वाला मो0 शाकिर है। जहां पूर्णिया निवासी मंटू महतो खलासी गंभीर घायल हो गया था। जिसको इलाज के दौरान हिरासत में लिया गया है। इस खबर में भी चालक और खलासी में कोई अंतर नहीं माना गया है। जिसका अंतर हर कोई जानता है।
इससे साफ है कि समाचारों में गलत तथ्यों का समावेश किसके लिए कितना हितकर साबित होगा। यह तो समय ही बताएगा। फिलहाल किसी तरह से समाचार को परोस तो दिया गया। अब केवल दैनिक जागरण पढ़ने वाले तो उसकी खबर को ही सही मानेंगे। लेकिन दूसरा अखबार भी लेने वाले संशय में पड़ रहे हैं। जबकि तीनों अखबार पढ़ने वाले अखबारी लाल तो दैनिक जागरण को गलत समाचारों वाला ही अखबार मानेंगे।

इससे दो चार दिन पहले नगरह गाँव के भगवान वैंकटेश के मंदिर की जर्जर स्थिति की खबर फोटो सहित प्रकाशित हुई थी। जिसमें छपी फोटो तीन चार साल पुरानी लगाई गयी थी। इस जर्जर मंदिर का जीर्णोद्धार भी डेढ़ दो साल पहले ही हो चुका है। तब इस खबर का कैसा और क्या औचित्य है । जिससे पूरा गाँव और पंचायत के साथ साथ मंदिर की गरिमा भी बेवजह धूमिल हुई। जबकि अखबार की खबर पर काफी भरोसा किया जाता है। समाचारों में गलत तथ्यों का समावेश कितना हितकर होगा? आखिर कैसे होगा इस अखबार के प्रति विश्वास?