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मंगलवार, 24 अक्तूबर 2017

फास्ट फूड बच्चों को बना रहा है दिल का मरीज

भागलपुर [अशोक अनंत]। बदलती जीवनशैली का असर अब बड़ों पर ही नहीं बल्कि बच्चों की सेहत पर भी दिखने लगा है। फास्ट फूड का सेवन करने के कारण बच्चे हृदय रोग से पीड़ित होने लगे हैं। खासकर पांच वर्ष से लेकर 15 वर्ष के तक बच्चे इस खतरनाक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) और शहर के निजी क्लीनिकों में ऐसे दर्जनों बच्चों का इलाज चल रहा है।

दरअसल, समय के साथ बच्चों के भी रहन-सहन व खान-पान में काफी परिवर्तन आया है। वे अब फास्ट फूड पर ज्यादा आश्रित हो गए हैं। जिसमें शामिल हानिकारक कैमिकल उन्हें बीमार बना रहा है। बच्चों के लिए सबसे खतरनाक कोल्ड ड्रिंक्स है। इतना ही नहीं खुले मैदान में खेलने-कूदने की जगह मोबाइल फोन पर घंटों गेम खेलना भी घातक साबित हो रहा है। खेल मैदान को छोड़कर मोबाइल पर ही क्रिकेट, फुटबॉल खेलने से शारीरिक श्रम नहीं हो पाता और बच्चे अल्प आयु में ही हृदय रोग के मरीज हो रहे हैं। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने भी स्वीकार किया है। डब्लूएचओ के मुताबिक देश में एक सौ बच्चों में से तीन हृदय रोग के मरीज हैं।

फास्ट फूड में उपयोग होने वाला तेल है खतरनाक

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष कुमार के मुताबिक फास्ट फूड कोई खाना नहीं बल्कि रोग है। फास्ट फूड में तेल को बार-बार उबाला जाता है। इससे रौसिंड केमिकल में बदल जाता है जो कैंसर जनित है। बार-बार फास्ट फूड खाने से हृदय की धमनिया आपस में चिपक जाती हैं जिससे खून की नली बंद होने लगती है। इसके अलावा पैकेट बंद खाद्य सामग्री बिस्कुट, कुरकुरे आदि भी हानिकारक हैं। इन सामग्रियों में हाइड्रोजोनेटेट नामक केमिकल डाला जाता है ताकि खाद्य सामग्रियां खराब नहीं हों। इस केमिकल को डालने से छह माह तक खाद्य सामग्रियां खराब नहीं होतीं। लेकिन इन्हें खाने से हृदय की धमनियों को नुकसान होता है। इसके अलावा शारीरिक श्रम नहीं करने की वजह से भी हृदय रोग होने की संभावना है। डॉ. आशीष नवगछिया के राजेश कुमार, सुल्तानगंज के सुमन यादव सहित कई बच्चों का इलाज कर चुके हैं जिनमें हृदय रोग के लक्षण पाए गए हैं।

सर्दी-खांसी का इलाज न होने पर 20 वर्ष बाद भी हो जाता है हृदय रोग

डब्लूएचओ के मुताबिक देश में 100 में तीन बच्चे इससे पीड़ित हैं। सर्दी-खांसी होने पर इलाज नहीं कराने से हृदय प्रभावित होता है। 20 वर्षो के बाद हृदय रोग हो जाता है। जिन बच्चों का इलाज नहीं किया जाता उनका फीसद 100 में 50 बच्चे हृदय रोग से पीड़ित हो जाते हैं। शिशु विभाग में आठ वर्षीय मोहद्दीनगर के जमशेद और 10 वर्ष की हुसैनाबाद की सकीना का इलाज किया जा रहा है।

गले में संक्रमण से भी होती है दिल की बीमारी

डॉ. मनीष कुमार के मुताबिक गले में संक्रमण स्टूप्टोकोकस बैक्टिरिया से होता है। तेज बुखार, पेट दर्द और लाल सूजा हुआ टॉन्सिल इसकी पहचान है। इलाज नहीं होने से संक्रमण तेजी से फैलता है और हृदय रोग होने की संभावना रहती है। इसके अलावा मोटापा भी हृदय रोग होने का कारण है। नाथनगर के 10 वर्षीय सूरज कुमार, लहेरी टोला की आठ वर्षीय अनिकेत आनंद सहित कई बच्चों का इलाज किया गया है।

हृदय रोग के लक्षण

-थकान होना

-सांस फूलना

-धड़कनें तेज होना

जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल के शिशु विभागाध्यक्ष डॉ आरके सिन्हा के अनुसार फास्ट फूड व कोल्ड डि्रंक्स का सेवन बच्चों के लिए काफी खतरनाक साबित हो रहा है। गंदगी के बीच रहने वाली घनी आबादी वाले क्षेत्र में पांच वर्ष के बच्चे रुमैटिक डिजीज से पीड़ित हो रहे हैं।

RBI ने चेताया है बैंकों को, बिना किच-किच के जमा करें सिक्के, पोस्टर भी लगाएं

नव-बिहार न्यूज नेटवर्क: बैंकों द्वारा सिक्के नहीं जमा करने की शिकायत को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) ने गंभीरता से लिया है. रिजर्व बैंक ने मास्टर सरकुलर के साथ बैंकों को पत्र लिखकर सिक्के लेने का आदेश जारी किया है. बैंकों द्वारा सिक्के नहीं जमा करने की शिकायत पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) ने गंभीर रुख अपनाया है. रिजर्व बैंक ने मास्टर सर्कुलर के साथ बैंकों को पत्र लिखकर सिक्के जमा करने का आदेश जारी किया है.

अब से बैंकों को न सिर्फ सिक्के जमा करने होंगे बल्कि, इसकी सूचना भी बैंक कैंपस में लगानी होगी. बीते कुछ समय से शिकायतें आ रही थीं कि बैंककर्मी सिक्के जमा करने में आनाकानी कर रहे हैं. बैंक के इस रुख से आम लोगों को भारी परेशानी हो रही थी. इसी को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने यह मास्टर सर्कुलर जारी किया.

इसके मुताबिक, जिन बैंक शाखाओं में चेस्ट की सुविधा नहीं है, करेंसी चेस्ट को उन शाखाओं से सिक्के लेने के लिए भी कहा गया है. हालांकि, आरबीआइ के इस नियम के मुताबिक, अकाउंट होल्डर एक दिन में एक रुपये से अधिक मूल्य वर्ग के एक हजार रुपये तक के सिक्के जमा करा सकता है. रिजर्व बैंक ने मास्टर सरकुलर अटैच कर बैंकों को चेताया है कि वे सिक्के लेने के लिए बाध्य हैं. यह भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने कैंपस में यह सूचना भी लगानी होगी कि उनके यहां सिक्के भी जमा किए जाते हैं.

सभी बैंक और उनकी शाखाएं अपने खाताधारक को आरबीआइ की गाइडलाइन के मुताबिक सेवाएं देने को बाध्य हैं. इनमें सभी प्रचलित मूल्य वर्ग के नए और साफ सुथरे नोट एवं सिक्के जारी करने, कटे-फटे और गंदे नोट बदलने और किसी भी ट्रांजेक्शन और बदलाव में सिक्कों को स्वीकार करने के लिए बाध्य है. प्रतिदिन प्रति खाताधारक एक हजार रुपये कीमत तक के एक रुपये और उससे अधिक मूल्य वर्ग के सिक्के जमा कर सकता है. 50 पैसे के सिक्के कुल 10 रुपये तक ही जमा होंगे.

किसानों को मिली वैज्ञानिक तरीके से खेती की जानकारी

नव-बिहार समाचार, नवगछिया : नवगछिया प्रखंड कृषि पदाधिकारी अनिल कुमार ने सोमवार को प्रखंड मुख्यालय में आयोजित रबी महाअभियान सह महोत्सव 2017 के दौरान किसानों को बीजोपचार करने के बाद ही खेती करने की विस्तृत जानकारी दी। वहीं मौके पर वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की जानकारी सबौर कृषि विश्वविद्यालय से आए कृषि वैज्ञानिक एके झा, अवधेश कुमार पाल ने किसानों को गेहूं, मक्का, चना, मटर, की खेती के बारे में तकनीकी जानकारी दी।

इस रबी महोत्सव का प्रखंड प्रमुख सुमित्रा देवी, उपप्रमुख विजय कुमार सिंह, बीडीओ राजीव कुमार रंजन, किसान पारसनाथ साहू ने दीप प्रज्वलित कर विधिवत उद्घाटन किया। मौेके पर किसान मो इरफान, विद्यानंद राय, सुरेश सिंह, कंचन कुमारी के अलावा किसान सलाहकार हितेश कुमार, गौतम कुमार, विन्देश्वरी प्रसाद यादव, बालमुकुंद कुमार, धर्मेंद्र कुमार, संतोष कुमार की मौजूदगी देखी गयी।

खुले में शौच करने वाले हो सकते हैं सरकारी लाभ और सुविधा से वंचित

नव-बिहार समाचार, नवगछिया (भागलपुर) : खुले में शौच को बंद करने के लिये तथा सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अब यह जरूरी हो गया है कि पहले घरों में शौचालय बनवाएं। तभी आपको सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। अन्यथा, आपको वंचित कर दिया जाएगा। उक्त बातें सोमवार को जिला परिवहन पदाधिकारी सह उपविकास आयुक्त राजेश कुमार व बीडीओ नवगछिया सह रंगरा राजीव कुमार रंजन ने संयुक्त रूप से कहीं। मौका था, नवगछिया प्रखंड के सभागार में आयोजित स्वच्छता ग्राहियों के प्रशिक्षण शिविर का। इसमें दोनों प्रखंड के स्वच्छता ग्राहियों को शौचालय निर्माण कराने के लिए प्रशिक्षण दिया गया।

मौके पर ही समय सीमा के अंदर नवगछिया व रंगरा चौक प्रखंड को ओडीएफ घोषित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मौके पर जिला परिवहन पदाधिकारी सह उपविकास आयुक्त राजेश कुमार ने कहा कि घरों में शौचालय बनवाना जरूरी हो गया है। अन्यथा, राशन-केरोसिन के लाभ से वंचित कर दिया जाएगा। आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिलने वाली सुविधाएं भी बंद कर दी जाएगी। हमारे घर में शौचालय अत्यंत आवश्यक है। कितने ही ऐसे घर हैं, जहां बाइक, रंगीन टीवी व अन्य जरूरी सामान हैं। किंतु उन घरों में शौचालय नहीं हैं। शौचालय घर में नहीं रहने से हमारा सिर शर्म से झुक जाता है। प्रोत्साहन राशि तो बहाना है। हमें हर घर में शौचालय बनवाना है। सामाजिक सुधार मिशन के तहत जन-जन के मन को शौचालय बनवाने के लिए उद्वेलित करना है।

वहीं बीडीओ राजीव कुमार रंजन ने कहा कि समय सीमा के अंदर नवगछिया व रंगरा चौक प्रखंड क्षेत्र के सभी घरों में शौचालय बनवाने का संकल्प लिया गया है। रंगरा चौक प्रखंड की नौ पंचायत व नवगछिया प्रखंड की छह पंचायत को ओडीएफ घोषित करना है। इस मौके पर सीडीपीओ रश्मि रंजन भी मौजूद थीं।

नवगछिया भागलपुर में भी नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ महापर्व छठ

नव-बिहार समाचार, नवगछिया/ भागलपुर : देश भर में मशहूर लोक आस्था का महापर्व छठ बिहार के नवगछिया और भागलपुर में भी मंगलवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। पर्व को लेकर बाजार भी गुलजार हो गया है। सूप-डलिया, टोकरी के साथ साथ फल एवं कद्दू इत्यादि की खरीदारी शुरू हो गई है।

मंगलवार को होने वाले नहाय-खाय को लेकर सोमवार को बाजार में कद्दू की खूब बिक्री हुई। पर्व को लेकर कद्दू के दामों में भी काफी इजाफा हुआ। चार दिवसीय महापर्व के पहले दिन नहाय-खाय को व्रती स्नान पूजा-अर्चना कर अरवा चावल व कद्दू की सब्जी का प्रसाद ग्रहण करेंगे। वहीं दूसरे दिन बुधवार की शाम छठव्रती पंच देवता तथा नवग्रह की पूजा के साथ खरना का प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसमें गुड़ से बनी खीर का प्रसाद भगवान भास्कर को अर्पित किया जाता है। गुरुवार की शाम व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे। वहीं शुक्रवार की सुबह का अर्घ्य देने के साथ ही महापर्व संपन्न हो जाएगा।

ध्यान दें- छठ से लगातार चार दिनों तक बंद रहेंगे बैंक

नव-बिहार समाचार, नवगछिया/ भागलपुर : इस बार छठ पर्व पर खरीदारी के लिए एटीएम से पैसे निकालने में देर न करें। अन्य जरूरी बैंकिंग कामकाज भी आज से कल तक 26 अक्टूबर से पहले निबटा लें। क्योंकि छठ पर लगातार चार दिनों तक बैंक बंद रहेंगे।

जानकारी के अनुसार छठ पर्व पर दो दिनों का अवकाश है। इसलिए 26 एवं 27 अक्टूबर (गुरुवार एवं शुक्रवार) को बैंक बंद रहेंगे। इसके बाद 28 अक्टूबर को माह का चौथा शनिवार है। नियमानुसार माह के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंकों में अवकाश रहता है। 29 अक्टूबर को रविवार की साप्ताहिक छुट्टी है। इस तरह से बैंकों में चार दिनों की लगातार बंदी रहेगी।

बिहार प्रोविंसियल बैंक इम्पलाईज यूनियन के सचिव संजय तिवारी ने कहा कि एटीएम में क्षमता के अनुरूप पूरा पैसा डाला जाएगा जिससे छठ व्रतियों को असुविधा न हो। एसबीआइ की ओर से भी कहा गया कि एटीएम को सुचारू रखने के लिए बेहतर इंतजाम किए जाएंगे जिससे किसी को परेशानी न हो।

सोमवार, 23 अक्तूबर 2017

कुहासे में ट्रेन ने ली पांच छठव्रती महिलाओं की जान

नव-बिहार समाचार, मुंगेर आज सुबह सुबह गंगा स्नान के लिए जा रहीं पांच महिलाओं की कुहासे की वजह से ट्रेन से कटकर मौत हो गई। घटना मुंगेर भागलपुर के बीच जमालपुर के समीप की है। ट्रेन घनोरी से जमालपुर आ रही थी। जिसकी वजह से अप और डाउन दोनों ट्रेक पर परिचालन कई घंटों तक बंद रहा।

मिली जानकारी के मुताबिक अहले सुबह कुछ महिलाएं छठ की तैयारियों के लिए गंगा स्नान के लिए जा रही थीं, कुहासे की वजह से रेल ट्रैक को पार करते हुए उन्होंने दूर से आती ट्रेन को नहीं देखा और रेल ट्रैक को पार करते हुए हादसे का वहीं शिकार हो गईं ।

जीआरपी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पांच महिलाओं के शव बरामद हुए हैं, कुछ महिलाएं रेल ट्रैक पार कर गई थीं और कुछ तेज गति से आ रही ट्रेन की चपेट में आ गईं। सुबह कुहासा ज्यादा था जिसकी वजह से महिलाओं ने ट्रेन को नहीं देखा और उसकी चपेट में आ गईं।

घटना मुंगेर -भागलपुर के बीच जमालपुर के बीच सोमवार की सुबह की है, जहां  ट्रेन से कटकर 5 महिलाओं की मौत हो गई। जीआरपी ने पांच शव मिलने की पुष्टि की है। सभी गंगा स्नान को जा रही थीं। ट्रेन घनौरी से जमालपुर आ रही थी। घटना के बाद  अप और डाउन लाइन पर परिचालन बंद है।

पत्रकारिता निराश हो गई तो खतरे में पड़ जाएगा जनतंत्र : विजय कुमार चौधरी

बिनोद कर्ण, सिमरिया/बेगूसराय : जिले के सिमरिया धाम स्थित तुलार्क महाकुंभ स्थली में शास्त्र मंथन के प्रथम राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘पत्रकारिता का सामाजिक दायित्व’ विषय पर बहस दो धाराओं में बंटती नजर आयी. हालांकि दोनों धारा के लोगों ने सामाजिक दायित्व के बहाने पत्रकारिता पर मंडरा रहे खतरे को ही इंगित किया. विचारधारा का टकराव भी खुलकर सामने आया. संगोष्ठी के उद्घाटनकर्ता विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने कहा कि पत्रकारिता अगर निराश हो गई तो जनतंत्र खतरे में पड़ जाएगा.

मीडिया लोकतंत्र का चौथा खंभा है उसे विधायिका, न्यायपालिका व कार्यपालिका पर नजर रखनी है. मीडिया ने बड़े-बड़े घोटाले को उजागर कर सरकार को कार्रवाई करने के लिए विवश किया. उसने सामाजिक दायित्व का निर्वहन भी किया है लेकिन हाल के वर्षों में मीडिया ने नकारात्मक पहलु को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है, इससे उसे बचाना चाहिए.

विधानसभा अध्यक्ष श्री चौधरी ने यह भी कहा कि मीडिया जगत को सकारात्मक पहलू को प्राथमिकता देनी चाहिए. ताकि समाज में अच्छा संदेश जाए और लोग उसका अनुकरण कर सके. उन्होंने कहा कि सामाजिक दायित्व से कोई अछूता नहीं है लेकिन मीडिया पर इसका दायित्व अधिक है. मीडिया इन दिनों नकारात्मक खबरों को प्रमुखता से लीड बना रहा है. जो दिखाया या छापा जाता है उसका लोग अनुकरण भी करते हैं. इस पहलू पर भी मीडिया को गौर करना चाहिए.

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विधानसभा का सत्र चल रहा था. एक ही दिन 180 विधायक ने रक्‍तदान किया और उसी दिन एक विधायक गंदा आचरण के कारण जेल गया. एक व्यक्ति के गंदे आचरण की खबर पहले पन्ने पर लीड बन गई और 180 विधायक के अच्छे आचरण की खबर पेज 8-9 पर 2 कालम में समेट दी गई. उन्होंने कहा कि विधानसभा के अंदर कुछ विधायक हंगामा करते हैं तो पहले पन्ने की लीड बनती है. जबकि अच्छे वक्ता की बातें अंदर के पेज पर चली जाती है. खबरों की सुर्खी बनने के लिए भी हंगामा करने की प्रवृति इससे पैदा होती है. इसे मीडिया को ध्यान में रखना होगा.

उन्होंने कहा कि आजकल पहला पेज ढूंढना भी आसान नहीं रह गया है. जैकेट पेज की भी कोई सीमा नहीं रह गई है. उन्होंने कहा कि उनके पहल पर बिहार के पत्रकारिता में थोड़ा बदलाव आया है. अखबार अब उत्कृष्ट वक्ता का कालम शुरू किया है. जो विधायक अच्छा बोलते हैं उन्हें इस कालम में जगह मिलती है.

इससे पूर्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत प्रचार प्रमुख राजीव तुली ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि आज मीडिया को लेकर निराशा की स्थिति पैदा हो गई. मीडिया के समक्ष अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने की चुनौती है. मिशन की पत्रकारिता को कमीशन की पत्रकारिता मत बनाइए. टीवी व अखबार में जो दिखाया व छापा जाता है वही देश की सच्चाई नहीं है. दूरदर्शन के दर्शकों व अखबार के पाठकों का मंच होना चाहिए जो सप्ताह में बैठकर समीक्षा करें. जबतक समाज का अंकुश नहीं रहेगा तबतक टीआरपी बढ़ाने के लिए खबरों को ऐसे ही परोसा जाएगा.

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम ने कहा कि पत्रकार का दायित्व है कि वे सरकार व सत्ता पर नजर रखे. जनता के हितों को सामने रखकर सच्चाई सामने लाये. लेकिन यहां वाल्मीकि को रत्नाकर व रत्नाकर को वाल्मीकि के रूप में पेश करने का काम शुरू हो गया है. उन्होंने कहा कि मैंने आदित्यनाथ योगी का इंटरव्यू लिया. जो सवाल थे वह किसी भी नेता से उसी तरह करता. लेकिन उस इंटरव्यू के कारण सोशल मीडिया पर जितनी गाली दी गई वह जायज है क्या.

उन्होंने पूछा कि क्या सामाजिक समरसता की बात नहीं करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि गांव को सांसद ने गोद लिया या गांव के गोद में सांसद बैठ गए यह सवाल पूछा जाना चाहिए या नहीं. साढ़े 3 करोड़ शौचालय का निर्माण हुआ और वहां पानी का बूंद नहीं टपका या नहीं उसे उठाया जाए या नहीं. ताजमहल का मुद्दा उठा तो लाजिमी है कि लालकिला का मुद्दा भी उठेगा.

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर ने कहा कि नेताओं व पत्रकार में कोई अंतर नहीं रह गया है. सरकार की स्तुति व मानवाधिकार के नाम पर खबरों को मरोड़ना पत्रकारिता है क्या. एक जगह आप जाति छुपाते हैं तो दूसरी जगह जाति को उछालते हैं. किसी व्यवसाय के टर्नओवर व मुनाफा में अंतर नहीं समझते तो सौ करोड़ की नोटिस पर घबराते क्यों हैं. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उछालते हैं तो लद्दाख का मुद्दा भी उठाइए.

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के राजस्व का माडल डिजाइन होना चाहिए. उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के भाव कट जाएंगे तो पराभव तय है. डीडी1 के पत्रकार राजेश राज ने भी संबोधित किया. संचालन लोकसभा टीवी के श्याम सहाय ने संचालन किया. स्वागत भाषण कुंभ सेवा समिति के महासचिव सह विधान पार्षद रजनीश कुमार व धन्यवाद ज्ञापन अध्यक्ष डॉ नलिनी रंजन ने किया. इस मौके पर अतिथियों को शॉल मोमेंटो व दिनकर की पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया. विजय कुमार चौधरी समेत अन्य अतिथियों ने दीप प्रजवलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया.

छठ पूजा: पटना में गंगा किनारे तैयार हुए 101 घाट, जहां ये हैं मूलभूत सुविधाएं

नव-बिहार न्यूज नेटवर्क, पटना । लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा को लेकर राजधानी पटना में गंगा किनारे 101 घाट अर्घ्य देने के लिए तैयार हैं। सभी घाट और रास्ते रविवार की रात रोशनी से जगमग हो गए। अशोक राजपथ और उससे जुड़ी सड़कें जगह-जगह रोशनी से नहाने लगीं हैं। चेंजिंग रूम, यूरिनल, शौचालय, वाच टॉवर, नियंत्रण कक्ष, यात्री शेड आदि का काम भी पूरा कर लिया गया है। बैरिकेडिंग भी लगभग पूरी हो गई है। दानापुर से पटना सिटी के बीच 20 किमी लंबे गंगा तट पर अर्घ्य देने की व्यवस्था की गई है।

गंगा तट पर बने 101 घाटों में 107 स्थानों पर नियंत्रण कक्ष, 598 चेंजिंग रूम, 198 वॉच टावर, दस यात्री शेड, 294 शौचालय, 577 यूरिनल और 96 हैंड पंप लगाए गए हैं। सुरक्षा की दृष्टिकोण से घाटों को 21 सेक्टर में बांटा गया है। गंगा तट वाले घाटों पर 512 दंडाधिकारी तैनात किए गए हैं। जिले के अन्य हिस्सों में इसके अतिरिक्त दंडाधिकारी तैनात किए गए हैं।

दानापुर अनुमंडल में पांच, पटना सदर अनुमंडल में 36 और पटना सिटी अनुमंडल में 60 घाट हैं। प्रत्येक घाट पर व्रतियों के मूलभूत सुविधाओं का ध्यान रखा गया है। दीघा से महेंद्रू के बीच में गंगा शहर से दूर हैं। यहां गंगा तट तक जाने का रास्ता भी बनाया गया है। रास्ते पर भी लाइटें लगी हैं। चेंजिंग रूम पूरी तरह से तैयार हो गया है। डबल कपड़ा लगाया गया है। हैंड पंप से पानी निकलने लगा है। जगह-जगह पर पानी के टैंकर भी रखे हुए हैं।

100 नावों से होगी गश्ती

जिला प्रशासन ने प्रत्येक घाट पर दंडाधिकारी के साथ फोर्स की तैनाती की है। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ की टीम गंगा नदी में गश्ती करते रहेगी। इसके साथ गोताखोर भी घाटों पर तैनात किए गए हैं। ये करीब 100 नावों से गश्ती करेंगे। प्रत्येक घाट पर निबंधित नावों को भी आपातकाल में निपटने के लिए तैनात किया गया है।

प्रत्येक घाट पर दंडाधिकारी, पुलिस अधिकारी, फोर्स, बिजली, नगर निगम, गोताखोर और बुडको के प्रतिनिधी होंगे। डॉक्टरों की टीम जीवन रक्षक दवाओं और एम्बुलेंस के साथ तैनात रहेगी।

जिलाधिकारी पटना संजय कुमार अग्रवाल ने कहा है कि छठ घाटों को समय रहते तैयार कर लिया गया है। 26 अक्टूबर को पहला अर्घ्य है। अब देखा जाएगा कि क्या कमियां रह गई हैं। जो कमियां होंगी उन्हें इस बीच दुरुस्त किया जाएगा।

घाटों पर ये हैं सुविधाएं

598 चेंजिंग रूम

577 यूरिनल

294 शौचालय

198 वाच टॉवर

107 नियंत्रण कक्ष

96 हैंड पंप

10 यात्री शेड

विक्रमशिला सेतु पर पुनः भीषण जाम की संभावना, लोग हो रहे परेशान

नव-बिहार न्यूज नेटवर्क, नवगछिया/ भागलपुर : पूर्व बिहार को उत्तर बिहार से जोड़ने वाले भागलपुर में गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु पर छठ पूजा को लेकर अगले दो तीन दिनों तक भीषण जाम की संभावना बनी हुई है। लोक आस्था के इस महापर्व छठ के दौरान गंगा स्नान (नहाय-खाय) का भी काफी बड़ा महत्व माना जाता है। इस दौरान हजारों की संख्या में महिला श्रद्धालु अहले सुबह से ही गंगा स्नान को उमड़ पड़ती हैं। जिसकी वजह से सेतु पर तथा सेतु मार्ग में यत्र तत्र वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।

बताते चलें कि कल रविवार को छुट्टी के दिन भी तीन घंटे से अधिक लगे जाम से लोग त्रहिमाम करते रहे। गंगा स्नान करने के लिए आने वाले लोगों के लिए सड़क किनारे ऑटो एवं अन्य वाहन खड़ा करने की वजह से जाम की समस्या उत्पन्न हो गई थी। जाम के कारण सेतु पर सुबह दस बजे से एक बजे तक वाहनों की लंबी कतार लगी रही।

इस जाम के कारण नवगछिया से भागलपुर आने-जाने वालों को पैदल ही पुल पार करना पड़ा। खासकर महिलाएं, इलाज के लिए आने वाले लोगों को काफी परेशानी हुई। हैरानी की बात यह थी पुल पर काफी देर तक ट्रैफिक की कमान संभालने के लिए कोई जवान मौजूद नहीं थे।

विक्रमशिला सेतु पर रविवार को वाहन रेंगते दिखे। जवानों के काफी मशक्कत के बाद काबू पाया जा सका। मगर रह रहकर जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही थी। भागलपुर से नवगछिया की दूरी महज 30 किलोमीटर है मगर यह दूरी तय करने में तीन घंटे से ज्यादा का समय लोगों को लगा। भागलपुर स्टेशन से और नवगछिया स्टेशन से ट्रेन पकड़ने वाले यात्रियों के रविवार का दिन काफी कष्टप्रद रहा। कई लोग सुबह सुबह जाम के डर से निकल गए। मगर पुल पर जाते ही वे लंबे जाम की जद में आ गए। सभी अपने अपने फोन पर हर मिनट ट्रेन के समय की जानकारी ले रहे थे। ताकि उनकी ट्रेन छुटे नहीं। वहीं कुछ लोगों की ट्रेन जाम की वजह से भी छुटी है।

छठ या षष्‍ठी देवी की पूजा की शुरुआत कैसे? पुराण की कथा क्‍या है?

राजेश कानोडिया/ अमरेश सौरभ

लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की शुरुआत और इसकी पौराणिक कथा के बारे में जिज्ञासा स्‍वाभाविक है, क्‍योंकि इस लोक महापर्व का फैलाव देश के कई भागों तेजी से होता जा रहा है.

इस व्रत में सूर्य देवता के साथ-साथ षष्‍ठी देवी की भी पूजा की जाती है. षष्‍ठी देवी को ही स्‍थानीय बोली में छठ मैया कहा गया है.

षष्‍ठी देवी को ब्रह्मा की मानसपुत्री भी कहा गया है, जो नि:संतानों को संतान देती हैं और सभी बालकों की रक्षा करती हैं. आज भी देश के बड़े भाग में बच्‍चों के जन्‍म के छठे दिन षष्‍ठी पूजा या छठी पूजा का चलन है.

षष्‍ठी देवी की पूजा की शुरुआत कैसे हुई, इस बारे में पुराण में एक कथा है. ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, यह कथा इस तरह है:

प्रथम मनु स्‍वायम्‍भुव के पुत्र थे प्रियव्रत. राजा प्रियव्रत को कोई संतान नहीं थी, इसके कारण वह दुखी रहते थे. एक बार उन्‍होंने म‍हर्षि कश्‍यप से संतान का सुख मिलने का उपाय पूछा.

महर्षि कश्‍यप ने राजा से पुत्रेष्‍ट‍ि यज्ञ कराने को कहा. राजा ने यज्ञ कराया, जिसके बाद उनकी महारानी मालिनी ने एक पुत्र को जन्‍म दिया. लेकिन दुर्योग से वह शिशु मरा पैदा हुआ था. यह देखकर राजा शोक में डूब गए. राजा के दुख से उनके परिजन और अन्‍य लोग भी आहत हो गए.

तभी एक चकित करने वाली घटना घटी. आकाश से एक सुंदर विमान उतरा, जिससे एक दिव्‍य नारी प्रकट हुईं. जब राजा ने उनसे प्रार्थना की, तब उस देवी ने अपना परिचय दिया, ‘’मैं ब्रह्मा की मानसपुत्री षष्‍ठी देवी हूं. मैं विश्‍व के सभी बालकों की रक्षा करती हूं. नि:संतानों को संतान देती हूं.’’

इसके बाद देवी ने मृत शिशु को आशीष देते हुए हाथ लगाया, जिससे वह जीवित हो गया. देवी की इस कृपा से राजा बहुत खुश हुए. उन्‍होंने षष्‍ठी देवी की स्‍तुति की.

देवी ने राजा प्रियव्रत को अपने राज्‍य में ऐसी व्‍यवस्‍था करने को कहा, जिससे प्रजा भी इस पूजा के बारे में जान सके और इसे करके सुफल पा सके. इसके बाद राजा हर महीने शुक्‍लपक्ष की षष्‍ठी तिथि को षष्‍ठी देवी की पूजा करवाने लगे.


ऐसी मान्‍यता है कि इसके बाद ही धीरे-धीरे हर ओर इस पूजा का प्रचार-प्रसार हो गया.

नदी किनारे सूर्यषष्‍ठी व्रत की तैयारी करती महिलाएं

स्‍कंदपुराण में राजा के नीरोग होने की कथा

स्‍कंदपुराण में भी षष्‍ठी व्रत के बारे में एक कथा मिलती है. इस पुराण के अनुसार, नैमिषारण्‍य में शौकन आदि मुनियों के पूछने पर सूतजी कथा कहते हैं.

एक राजा थे, जो कि कुष्‍ठ रोग से ग्रस्‍त थे. उन्‍हें अपना राज्‍य भी छोड़ना पड़ गया था, जिससे वे अभाव में जी रहे थे. एक ब्राह्मण उस राजा को इस व्रत के बारे में बताते हैं. व्रत करके राजा निरोग हो जाते हैं, साथ ही अपना राज्‍य भी पा लेते हैं.

ताजमहल के बाहर 500 लोगों के साथ 26 को झाड़ू लगाएंगे सीएम योगी, देखेंगे शाहजहां की कब्र भी

नव-बिहार न्यूज नेटवर्क, आगरा। ताजमहल के महत्व को लेकर उठे विवादों के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 26 अक्टूबर को ताजमहल का दौरा करेंगे. जहां वे 17वीं शताब्दी के इस स्मारक पर आधा घंटा समय बिताएंगे. इस दौरान वे शाहजहां और मुमताज महल की कब्र को भी देखेंगे. साथ ही सीएम योगी ताज के बाहर झाड़ू भी लगाएंगे. योगी का यह पहला ताज दौरा होगा.

500 लोगों के साथ लगाएंगे झाड़ू

ताजमहल के पश्चिमी गेट पर सीएम योगी पांच सौ लोगों के साथ झाड़ू लगाएंगे. इनमें पार्टी कार्यकर्ता, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता समेत जिले के गणमान्य लोग शामिल होंगे. साथ ही ताज की महत्वता पर योगी भाषण भी करेंगे.

यूपी टूरिज्म के प्रिसिंपल सेक्रेटरी अवनीश अवस्थी ने बताया कि 26 अक्टूबर को अपने आगरा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ताजमहल के अंदरूनी हिस्सों का दौरा करेंगे. योगी आदित्यनाथ ताजमहल का दौरा करने वाले यूपी के पहले बीजेपी सीएम होंगे.

इस दौरे पर यमुना नदी से ताजमहल तक प्रस्तावित कॉरिडोर के लिए यूपी के मुख्यमंत्री नदी से लगे इलाके का भी निरीक्षण करेंगे. साथ ही ताजमहल के सौंदर्यीकरण की योजनाऔ का जायजा भी लेंगे. इसके अलावा आगरा के विकास के लिए कई योजनाओं की घोषणा की जाएगी.

योगी के ताज दौरे की घोषणा उस समय हुई है, जब हाल ही में ताजमहल को लेकर विवादों की एक श्रृंखला शुरू हो गई. इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश टूरिज्म की उस किताब से हुई जिसमें ताजमहल को कोई स्थान नहीं मिला. बीजेपी विधायक संगीत सोम ने ताजमहल को भारतीय इतिहास पर दाग बता डाला. फिर बीजेपी सांसद विनय कटियार ने कहा कि वास्तव में ताजमहल एक शिव मंदिर है.

बहरहाल, पिछले सप्ताह गोरखपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए योगी ने ताजमहल को ‘भारत का गर्व’ बताया और इसे एक विश्व स्तरीय स्मारक की संज्ञा दी. योगी का यह बयान पिछले साल बिहार में दिए गए उनके बयान के ठीक उलट था, जिसमें उन्होंने कहा था कि ताजमहल भारतीय संस्कृति का प्रतीक नहीं हो सकता. उन्होंने कहा था कि विदेशी मेहमानों को ताजमहल की प्रतिकृति देने के बजाय गीता भेंट की जानी चाहिए.

ताजमहल का दौरा करने वाले उत्तर प्रदेश के आखिरी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव थे. दो साल पहले वैलेंटाइन डे के दिन अखिलेश यादव अपनी पत्नी और कन्नौज की सांसद डिंपल यादव के साथ ताज के सामने की बेंचों पर बैठे थे और परिसर में भ्रमण किया था.

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