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बिहार करेगा कृषि क्षेत्र में देश की मदद : नीतीश


बिहार के किसानों में इतनी क्षमता है कि वे अपने राज्य ही नहीं बल्कि देश को भी भरपूर अन्न खिलाने की क्षमता रखते हैं। हमें खुशी है कि पांच अगस्त 2010 को कृषि विश्वविद्यालय के उद्घाटन पर भी यहां आए थे। अब दीक्षांत समारोह के जरिए वे छात्र-छात्राओं को यहां डिग्रियां प्रदान करने आए हैं। संस्थान ने छात्र-छात्राओं के अलावा श्रेष्ठ शिक्षकों को भी सम्मानित किया। यह स्वस्थ परंपरा है।
उपरोक्त बातें बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने मंगलवार को भागलपुर के सबौर स्थित कृषि विश्व विद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा । मौके पर सीएम ने दीक्षांत समारोह में 13 स्वर्ण पदक समेत 452 छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की। डिग्री पाने वालों में 30 फीसद महिलाएं शामिल थीं। नीतीश ने इस आंकड़े को बढ़ाकर 50 फीसद तक पहुंचाने की अपील की।
इस मौके पर नीतीश ने कृषि वैज्ञानिकों से जलवायु परिवर्तन पर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक किसानों को बताएं कि बदलते मौसम की वजह से कौन सी फसलें लगाना उनके लिए हितकर होगा। साथ ही यह भी बताएं कि उन फसलों से किसानों को कितना आर्थिक लाभ होगा।
मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय के कुलपति से इस क्षेत्र में शोध करने की अपील की। सीएम ने दावा किया कि कृषि के क्षेत्र में हम नई ऊंचाइयां प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि बिहार की 76 फीसद आबादी कृषि पर निर्भर है। कृषि के विकास से ही राज्य के लोगों की आमदनी बढ़ेगी, गरीबी घटेगी। यही वह क्षेत्र है जिसमें काम कर निर्धनता दूर की जा सकती है।
सीएम ने कहा कि हम सूखे की मार भी झेलते हैं। उन्होंने राज्य के किसानों से साथ मिलकर इंद्रधनुषी क्रांति को साकार करने की अपील की। कृषि की पढ़ाई पढ़ रहे युवाओं से कहा कि वे इसमें विशिष्ट ज्ञान हासिल करें। उन्होंने हाईस्कूल व इंटर में भी कृषि की पढ़ाई को जरूरी बताया। नीतीश ने कहा कि कृषि रोड मैप पर पांच वर्षों में डेढ़ लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। धान का नया रिकॉर्ड बन रहा है। अब गेहूं का भी राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम हो गया है। गेहूं की उत्पादकता बढ़ने पर लगातार दूसरी बार बिहार को पुरस्कार मिल रहा है।
नीतीश ने इंद्रधनुषी क्रांति के तहत दलहन, तिलहन, दुग्ध, मत्स्य, पशुपालन, पोल्ट्री व बकरी पालन पर जोर दिया। सीएम ने कहा कि नए कृषि रोड मैप में विपणन, स्टोरेज व प्रसंस्करण पर बल दिया गया है। इसके पूर्व कुलपति डॉ. मेवालाल चौधरी और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।