शीतलाष्टमी आज: शीतला मंदिर में पूजा को उमड़ा राजस्थानी समाज
नवगछिया (भागलपुर)। जिले भर में आज सुबह से ही राजस्थानी समाज के लोगों द्वारा शीतला अष्टमी (बास्योडा) यानी बासी भोजन इत्यादि का त्योहार मनाया जा रहा है। इसकी तैयारी कल यानी मंगलवार से ही शुरू कर दी गई थी। सायं काल में ही भोजन बनाकर रखा गया और आज अहले सुबह से ही माता शीतला की पूजा अर्चना प्रारंभ हो गई। माता शीतला को गुड़ के गुलगुले और गुड़ के चावल, दही और रावड़ी तथा रोटी (सब कुछ ठंडे ही) बहुत पसंद हैं।
बताते चलें कि यह शीतला माता की पूजा का पर्व भारत के सभी राज्यों में फैले राजस्थानी समाज की महिला और पुरुष एवं बच्चे तथा बुजुर्ग सभी प्री श्रद्धा भाव से मनाते हैं। मान्यता है कि शीतला माता का स्वरूप शीतल है, इसलिए उनकी पूजा में आग या गर्म तत्वों का प्रयोग वर्जित है। इसलिए ही माता को ठंडा भोजन या बासी भोजन का भोग लगाया जाता है।
शीतला माता पूजा के मुख्य नियम:
- चूल्हा न जलाएं: पूजा के दिन घर में खाना नहीं पकाया जाता, एक दिन पहले ही ठंडा भोजन (बसौड़ा) तैयार किया जाता है।
- हल्दी का उपयोग: माता को हल्दी अवश्य अर्पित करें और प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों को लगाएं, क्योंकि यह रोगों को दूर करने वाली है।
- भोग: दही, बासी रोटी, चावल, पुआ, और बाजरा जैसी ठंडी वस्तुएं माता को अर्पित की जाती हैं।
- वस्त्र: माता को चुनरी और वस्त्र चढ़ाएं।
कुल मिलाकर, पूजा में दीपक जलाने की मनाही है, और माता को ठंडा भोजन व शीतल जल का अर्घ्य देना ही सबसे उत्तम माना जाता है।