जानें नवगछिया के नए SDM के. परीक्षित के बारे में
राजेश कानोड़िया, नवगछिया (भागलपुर)। बिहार सरकार ने शनिवार की देर रात 23 आईएएस पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी है। इसके तहत के. परीक्षित को नवगछिया अनुमंडल का नया SDM बनाया है। आइये जानें नए एसडीओ के बारे में कुछ खास जानकारी:-
के परीक्षित (K Parikshit) 2024 बैच के बिहार कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE 2023) में अपने 5वें प्रयास में अखिल भारतीय स्तर पर 596वीं रैंक हासिल कर सफलता प्राप्त की थी।
व्यक्तिगत एवं शैक्षणिक पृष्ठभूमि
- मूल निवासी: वह मुख्य रूप से राजस्थान के दौसा जिले (मेहंदीपुर बालाजी के अंतर्गत आने वाले ठीकरिया गांव) के रहने वाले हैं।
- जन्म तिथि: 9 अप्रैल 1997
- शैक्षणिक योग्यता: उन्होंने स्नातक में बी.ए. (B.A.) की डिग्री पूरी की है। उनके कॉलेज हॉस्टल के सीनियर्स और शैक्षणिक माहौल ने उन्हें सिविल सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया था।
वर्तमान पोस्टिंग और प्रशासनिक कार्य (बिहार)
- कैडर आवंटन: यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद उन्हें बिहार कैडर आवंटित किया गया।
- प्रारंभिक तैनाती: बिहार में उनकी शुरुआती तैनाती दरभंगा जिले में सहायक समाहर्त्ता सह सहायक दंडाधिकारी (Assistant Collector) के रूप में हुई।
- स्वतंत्र प्रभार (व्यवहारिक प्रशिक्षण): बिपार्ड (BIPARD) के व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत उन्हें दरभंगा के हनुमाननगर प्रखंड में बीडीओ (BDO) और सीओ (CO) का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया। इस दौरान उन्हें प्रशासनिक और राजस्व कार्यों की वास्तविक जिम्मेदारी संभालने के लिए वित्तीय शक्तियां भी प्रदान की गईं।
के परीक्षित (K Parikshit) एक बेहद साधारण और ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले परिवार से आते हैं। उनका परिवार मूल रूप से राजस्थान के दौसा जिले के अंतर्गत मेहंदीपुर बालाजी क्षेत्र के ठीकरिया गांव का रहने वाला है।
उनके पारिवारिक जीवन से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
माता-पिता और ग्रामीण जुड़ाव: उनके माता-पिता और पूरा परिवार गांव में ही निवास करता है। के परीक्षित का पालन-पोषण एक साधारण ग्रामीण माहौल में हुआ है, जहां उनके परिवार ने खेती-किसानी और सीमित संसाधनों के बीच उन्हें आगे बढ़ाया।
माता-पिता का संघर्ष: परीक्षित के मुताबिक, उनके माता-पिता ने उनकी शिक्षा और यूपीएससी (UPSC) की लंबी तैयारी के दौरान उनका पूरा सहयोग किया। पांचवें प्रयास में सफलता मिलने तक परिवार ने उन पर कभी किसी तरह का दबाव नहीं बनाया और उनका हौसला बनाए रखा।
प्रेरणा का स्रोत: उन्होंने अपने इंटरव्यू में बताया है कि उनके परिवार के बड़ों और हॉस्टल के सीनियर्स ने उन्हें हमेशा समाज सेवा और देश के सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर जाने के लिए प्रेरित किया।