विशाखापट्टनम। प्रशासन का दावा है कि उसने चक्रवाती तूफान हुदहुद से निपटने की पूरी तैयारी कर रखी है। लेकिन इन तैयारियों पर उड़ीसा के गोपालपुर के लोगों को भरोसा नहीं हो पा रहा। लाख चेतावनी के बावजूद गोपालपुर के लोग अपना घर छोड़कर साइक्लोन शेल्टर में जाने को तैयार नहीं। दरअसल गोपालपुर के लोगों को अभी पिछले तूफान की यादें ताजा हैं, उनके मुताबिक पिछली बार राहत केंद्रों में जरूरी सुविधाएं नहीं दी गईं।
ओडिशा में गंजम जिले के गोपालपुर में पूजा-पाठ का दौर जारी है। महातूफान हुदहुद के कहर से बचाने की गुहार लगाई जा रही है। शायद इंसानी तैयारियों पर भरोसा नहीं हो पा रहा इसलिए तूफान से आने वाली तबाही से खौफजदा लोग भगवान की शरण में आए हैं।
मंदिर में जुटे लोगों की सिर्फ आस्था नहीं दिख रही, बल्कि वो व्यवस्था भी दिख रही है जो तूफान से अक्सर दो-चार होने वाले इन लोगों में भरोसा नहीं जगा पाया है। गोपालपुर वही इलाका है जहां पिछले साल 12 अक्टूबर को पाइलीन तूफान ने दस्तक दी थी। एक साल बाद अब भी इस इलाके में उस तूफान से आई तबाही के निशान दिख जाते हैं। उजड़े मकान, टूटे रास्ते जस के तस हैं। जाहिर है यहां के लोगों में प्रशासन के खिलाफ गुस्सा है। यही वजह है कि अब हुदहुद की चेतावनी के बावजूद इस इलाके के लोग अपने कच्चे मकानों को छोड़कर जाना नहीं चाहते।
आपको बता दें कि गोपालपुर दक्षिणी ओडिशा का वो इलाका है जहां हुदहुद से काफी तबाही की आशंका जताई जा रही है। बावजूद इसके यहां के लोग राहत केंद्रों पर जाने से कतरा रहे हैं। हालांकि प्रशासन का कहना है कि उन्होंने अपनी ओर से पुख्ता तैयारी कर रखी है।
ज़्यादा खतरा यहां के 4 ज़िलों में हैं। ये हैं गंजम, मजपति, कोरापुट और मलकानगिरी। आशंका जताई जा रही है कि जब तूफान गोपालपुर में दस्तक देगा तो समंदर में ऊंची लहरें उठेंगी। ऐसे में चक्रवाती तूफान से अपने नावों को बचाने के लिए मछुआरे पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।
ओडिशा के गंजम जिले के बिनचपल्ली में हुदहुद से बचने के लिए तैयारियां चल रही हैं। मॉक ड्रिल के जरिए लोगों को सिखाया जा रहा है कि कैसे चक्रवाती तूफान से बचना है, लाइट जाने पर क्या करना है, तबाही से लोगों को कैसे बचाना है। दक्षिण पूर्व तटीय क्षेत्रों से होता हुआ विनाश का तूफान हुदहुद अंडमान निकोबार को पार कर चुका है।
हुदहुद ने अंडमान-निकोबार में काफी तबाही मचाई है। 180 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ने वाली तेज हवाओं की चपेट में आने से पेड़ उखड़ गए, सड़कें टूट गईं, बिजली और फोन की व्यवस्था ठप हो गई और अब जान के नुकसान का अंदेशा गहरा गया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि राज्य सरकारों की तैयारी तबाही के तूफान के आगे चट्टान की तरह नजर आएगी।
