बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती समुद्री तूफान हुदहुद 180 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। इस तूफान के 12 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तट पर पहुंचने की आशंका है। मौसम विभाग के मुताबिक हुदहुद तूफान विशाखापट्टनम के भीमली इलाके से टकराएगा। इसलिए यहां पर तूफान के असर को कम करने की पुख्ता तैयारी की गई है।
इस बीच प्रधानमंत्री ने गृहमंत्री से मामले पर नजर बनाए रखने और मुख्यमंत्रियों से संपर्क में रहने को कहा है। लोगों को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने के अलावा ने प्रशासन और नौसेना ने मिलकर राहत-बचाव टीम भी तैयार कर रखी है।
बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती समुद्री तूफान हुदहुद की दहशत हिंदुस्तान के समुद्री इलाकों फैल गई है। ये तूफान 180 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। इस तूफान के 12 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तट पर पहुंचने की आशंका है। हर कोई डरा हुआ है कि न जाने कब समुद्र की लहरें विकराल रूप धारण कर लें। मौसम वैज्ञानिकों से लेकर राज्य सरकारों तक, हुदहुद का हाई अलर्ट जारी कर चुकी हैं। खास बात यह है कि ये चक्रवात हर घंटे प्रचंड रूप ले रहा है और हिंदुस्तान की हदों की तरफ बढ़ रहा है। अब खतरा घनी आबादी पर मंडरा रहा है।
समुद्री तूफान हुदहुद का हाई अलर्ट जारी होते ही हर कोई डरा सहमा है। बंगाल की खाड़ी में मंडरा रहा हुदहुद अपनी तबाही का ट्रेलर दिखा चुका है। दक्षिण पूर्व तटीय क्षेत्रों से होता हुआ विनाश का तूफान अंडमान निकोबार को पार कर चुका है। हुदहुद ने अंडमान-निकाबोर में काफी तबाही मचाई है। 180 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ने वाली तेज हवाओं की चपेट में आने से पेड़ उखड़ गए, सड़कें टूट गईं, बिजली और फोन की व्यवस्था ठप हो गई और अब जान के नुकसान का अंदेशा गहरा गया है।
अब ये तूफान पश्चिम-उत्तर, पश्चिम की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। हिंदुस्तान में हुदहुद ने दहशत की तारीख भी मुकर्रर कर दी है। रविवार यानी 12 अक्टूबर को सुबह करीब साढ़े पांच बजे समुद्री इलाके सांय-सांय की आवाज से थर्रा उठेंगे। सबसे बड़ा खतरा, उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा पर है। मौसम विभाग की मानें तो तूफान ने विशाखापट्टनम की तरफ रुख कर लिया है।
12 अक्टूबर को हुदहुद विशाखापट्टनम से टकराएगा। फिर हुदहुद आंध्र प्रदेश के वेस्ट गोदावरी, ईस्ट गोदावरी, विशाखापट्टनम और विजयनगरम होते हुए श्रीकाकुलम की हदों में घुस जाएगा। यहां 24 से 25 सेंटीमीटर यानी भयानक बारिश हो सकती है। इसके साथ-साथ दक्षिणी ओडिशा के गंजाम, गजपति, कोरापुट और मल्कानगिरी में तबाही के निशान छोड़ सकता है। 20 लाख से ज्यादा यानी घनी आबादी वाले इलाकों के हुदहुद के रास्ते में होने की वजह से ये दहशत का पर्याय बन गया है। विशाखापट्टनम से हुदहुद की सीधी टक्कर के साथ ही हवाओं की रफ्तार तूफानी होगी। तबाही की बारिश होगी तो बिजली, सड़क, पेड़ सब ध्वस्त हो सकते हैं। यानी आंध्र प्रदेश और ओडिशा को 12 घंटे सावधान रहने की जरूरत है।
हुदहुद की दहशत से राज्य सरकारें अलर्ट हो चुकी हैं। विशाखापट्टनम में तबाही के हुदहुद से बचने के लिए कैंप लगाए जा रहे हैं। विशाखापट्टनम के तटीय गांवों को प्रशासन ने खाली करा लिया है। ओडिशा के मुख्यमंत्री किसी भी आपदा से निपटने के लिए बैठकें कर रहे हैं। ओडिशा के आठ जिलों में साढ़े तीन लाख लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया गया है, लेकिन तूफान से पहले हो रही बारिश से राहत बचाव में परेशानी हो रही है।
ओडिशा के गंजम जिले के बिनचपल्ली में हुदहुद से बचने के लिए तैयारियां चल रही हैं। मॉक ड्रिल के जरिए लोगों को सिखाया जा रहा है कि कैसे चक्रवाती तूफान से बचना है, लाइट जाने पर क्या करना है, तबाही से लोगों को कैसे बचाना है। उम्मीद की जानी चाहिए कि राज्य सरकारों की तैयारी तबाही के तूफान के आगे चट्टान की तरह नजर आएगी।
