भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा है कि ऊर्जा क्षेत्र
में आत्मनिर्भरता, मंदी और बढ़ती गरीबी के संकट से निपटने के लिए दुनिया
को तुरंत ध्यान देना चाहिए। उन्होंने 2030 तक इन लक्ष्यों को हासिल करने के
लिए अरबों डालर की एक कार्ययोजना भी सुझाई है। कलाम को प्रतिष्ठित पेकिंग
यूनिवर्सिटी में पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया है। प्रस्ताव से खुश कलाम ने
कहा है कि इस पर आखिरी फैसला
उनके शेड्यूल पर निर्भर करेगा।
शुक्रवार को चीन के सरकारी संस्थान बीजिंग फोरम कार्यक्रम में कलाम ने ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए क्षेत्रीय सहयोग को भी अहम करार दिया। उन्होंने कहा कि भारत को 20 हजार मेगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन करने जरूरत है। उन्होंने स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा के इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अगले पांच सालों में एक अरब डॉलर के खर्च की जरूरत भी जताई। व्यापार घाटे और वैश्विक मंदी पर कलाम ने कहा कि चीन और भारत भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति ने चीन, ब्राजील और भारत जैसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं को पेयजल, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में साथ मिलकर करने की सलाह भी दी। उन्होंने दुनिया के तीन अरब लोगों को गरीबी से उबारने के लिए गंभीर प्रयासों की हिमायत भी की। कलाम ने कहा कि अगले दशक में भारत परमाणु ईंधन के लिए यूरेनियम की बजाय थोरियम का इस्तेमाल शुरू करेगा।
शंघाई विवि में पढ़ाई जाएगी हिंदी
चीन की पेकिंग और गुआंगदोंग के बाद शंघाई यूनिवर्सिटी में भी चीनी और विदेशी छात्र हिंदी पढ़ सकेंगे। चीन में भारतीय राजदूत एस जयशंकर और शंघाई इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी के कार्यकारी उपाध्यक्ष फेंग किंघुआ ने 29 अक्टूबर को एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। शंघाई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने शुक्रवार को एक विज्ञप्ति में इसकी जानकारी दी।
उनके शेड्यूल पर निर्भर करेगा।
शुक्रवार को चीन के सरकारी संस्थान बीजिंग फोरम कार्यक्रम में कलाम ने ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए क्षेत्रीय सहयोग को भी अहम करार दिया। उन्होंने कहा कि भारत को 20 हजार मेगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन करने जरूरत है। उन्होंने स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा के इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अगले पांच सालों में एक अरब डॉलर के खर्च की जरूरत भी जताई। व्यापार घाटे और वैश्विक मंदी पर कलाम ने कहा कि चीन और भारत भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति ने चीन, ब्राजील और भारत जैसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं को पेयजल, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में साथ मिलकर करने की सलाह भी दी। उन्होंने दुनिया के तीन अरब लोगों को गरीबी से उबारने के लिए गंभीर प्रयासों की हिमायत भी की। कलाम ने कहा कि अगले दशक में भारत परमाणु ईंधन के लिए यूरेनियम की बजाय थोरियम का इस्तेमाल शुरू करेगा।
शंघाई विवि में पढ़ाई जाएगी हिंदी
चीन की पेकिंग और गुआंगदोंग के बाद शंघाई यूनिवर्सिटी में भी चीनी और विदेशी छात्र हिंदी पढ़ सकेंगे। चीन में भारतीय राजदूत एस जयशंकर और शंघाई इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी के कार्यकारी उपाध्यक्ष फेंग किंघुआ ने 29 अक्टूबर को एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। शंघाई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने शुक्रवार को एक विज्ञप्ति में इसकी जानकारी दी।
