बिहार के छपरा में हुई मध्यान्ह भोजन योजना के तहत 23 बच्चो की मौत के बाद से नवगछिया की स्कूलों में भी मिलने वाले इस सरकारी या स्कूली खाने से जहां लोग और बच्चे सभी तौबा करने लगे हैं | वहीं स्कूल
जाने वाले बच्चों से उसके माता पिता साफ शब्दों में कह रहे हैं - स्कूल के खाना ना बेटा ना खाना | मामले से सभी की सोच स्पष्ट है कि बच्चा बचा रहेगा तो रस्सी बाँट कर भी अपना अथवा परिवार का गुजारा चला लेगा | जिससे खानदान का खात्मा तो नहीं होगा |
नवगछिया में गुरुवार को स्कूल जा रही अपनी बेटी निशा को आशा देवी ने साफ शब्दों में स्कूल का खाना खाने की मनाही कर दी | वहीं मीना देवी ने भी अपने बेटे रौशन को दोपहर का खाना स्कूल में खाने से मना करते हुए हाथ में लंच बॉक्स थमा दिया |
इसके अलावा नवगछिया शहर स्थित मदरसा सहित कई स्कूलों के बच्चों ने घटना की जानकारी मिलने बाद से स्वयं खाना खाने मनाही करते हुए मध्यान्ह भोजन का बहिष्कार भी किया है |
जाने वाले बच्चों से उसके माता पिता साफ शब्दों में कह रहे हैं - स्कूल के खाना ना बेटा ना खाना | मामले से सभी की सोच स्पष्ट है कि बच्चा बचा रहेगा तो रस्सी बाँट कर भी अपना अथवा परिवार का गुजारा चला लेगा | जिससे खानदान का खात्मा तो नहीं होगा |
नवगछिया में गुरुवार को स्कूल जा रही अपनी बेटी निशा को आशा देवी ने साफ शब्दों में स्कूल का खाना खाने की मनाही कर दी | वहीं मीना देवी ने भी अपने बेटे रौशन को दोपहर का खाना स्कूल में खाने से मना करते हुए हाथ में लंच बॉक्स थमा दिया |
इसके अलावा नवगछिया शहर स्थित मदरसा सहित कई स्कूलों के बच्चों ने घटना की जानकारी मिलने बाद से स्वयं खाना खाने मनाही करते हुए मध्यान्ह भोजन का बहिष्कार भी किया है |