नव-बिहार समाचार, भागलपुर। लोक आस्था और सूर्योपासना अनुष्ठान का महापर्व छठ पूजा मंगलवार से नहाय खाय के साथ प्रारंभ हो गया। छठव्रतियों ने स्नान, ध्यान के
साथ अरवा चावल, चना दाल और कद्दू की सब्जी बनाकर ग्रहण किया। घर के सदस्यों ने भी प्रसाद ग्रहण किया। दूसरी ओर छठव्रतियों के द्वारा खरना की प्रसाद के लिए गेंहु आदि धोकर सुखाने का काम किया। वहीं पूरे बिहार के शहरी और ग्रामीण इलाकों में चारों ओर छठ मईया के गीत गूंज रहे हैं।
आज इसका दूसरा दिन है इस दिन खरना व्रत की परंपरा निभाई जाती है। इस मौके पर महिलाएं दिन भर उपवास करती हैं और शाम में भगवान सूर्य को खीर-पूड़ी, पान-सुपारी और केले का भोग लगाने के बाद प्रसाद को बांटा जाता है। इस दिन मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर खीर तैयार की जाती है। इसमें आम की लकड़ी का प्रयोग विशेष तौर पर होता है। मिट्टी के नए चूल्हे पर दूध, गुड़ व अरवा चावल से खीर और गेहूं के आटे की रोटी का प्रसाद बनाया जाएगा। प्रसाद बन जाने के बाद शाम को सूर्य की आराधना कर उन्हें भोग लगाया जाता है और फिर व्रती प्रसाद ग्रहण करती है।