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सुना सुना ही रहा सावन का पहला दिन


जहां सावन के महीने में मौसम की घटा और बहार देख जंगलों में मोर तक नाचने लग जाते हैं। वहीं इस साल सावन के पहले ही दिन मौसन ने अपना उल्टा रुख दिखाया है। जिसे देख जंगल का मोर तो क्या लोगों के मन का मोर भी नहीं नाच सका। 
सावन मास की पहली सुबह जहां आशा भरी थी कि आज से तो सावन का बदरा बरसेगा ही । लेकिन नवगछिया में दिन भर इसका उल्टा ही नजारा रहा। आसमान से बदरा तो नहीं बरसा, उसकी जगह आग जरूर बरसती रही। इस दौरान काफी जरूरतमंद लोग ही घरों से बाहर निकल पाये। इधर घरों में रह रहे लोगों को भी जहां तपिस और उमस ने खूब तपाया। वहीं बार बार गायब हो रही बिजली ने भी खूब रुलाया। शाम में भी बादलों ने घेरा बंदी जरूर की, लेकिन बरस नहीं सके। 
वहीं जानकारों का कहना है कि यह स्थिति तो ग्लोबल वार्मिंग का ही नतीजा है। अब वो पहले वाली बात नहीं रही। मौसम में काफी बदलाव आ चुका है। इसके अलावा कमजोर मानसून की भी इस साल भविष्यवाणी हो चुकी है। तो फिर आसमान से आग ही बरसने की संभावना बनी हुई है। जबकि आषाढ़ मास भी सुना सुना सा बीत गया। लेकिन सावन मास में तो बदरिया के बरसने की आस सभी की होती है। इसी आस के साथ आसमान पर टिकी है लोगों की निगाहें ।