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बिहार में नियोजित शिक्षकों को वेतनमान नहीं

बिहार में राज्य के नियोजित शिक्षकों को वेतनमान नहीं मिलेगा
सरकार ने ऐसे शिक्षकों के समान कार्य के बदले समान वेतन की मांग को खारिज कर दिया है.  वैसे  सरकार ने यह भरोसा भी दिया है कि भविष्य में संसाधन को देखते हुए नियोजित शिक्षकों के वेतन में बढ़ोतरी की जाएगी ताकि वे सम्मानजनक ढंग से जीवन यापन कर सकें. शिक्षा मंत्री पीके शाही ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी. उल्लेखनीय है कि इसी मुद्दे को लेकर राज्य के कई जिले में मुख्यमंत्री की सभा में नियोजित शिक्षकों ने हंगामा किया था.
शिक्षा मंत्री ने कहा कि अगर नियोजित शिक्षकों का वेतनमान तय
कर दिया जाएगा तो विकास के सभी काम बंद करने होंगे. करीब 15 से 20 हजार करोड़ रुपये सिर्फ वेतन पर देने होंगे. उन्होंने कहा कि सरकार उनके वेतन बढ़ाने को लेकर खुद चिन्तित है. राज्य में अभी करीब ढाई लाख नियोजित शिक्षक हैं और आने वाले वर्षो में पांच लाख शिक्षकों की नियुक्ति की जानी है. उन्होंने कहा कि नियुक्ति के समय ही सरकार ने साफ कर दिया था उनकी नियुक्ति नियत वेतनमान पर की जायेगी. इसके लिए नियमावली भी बनायी गयी है. नियुक्ति के लिए उन शिक्षकों की तब सरकार ने परीक्षा भी नहीं ली थी. कोई प्रक्रिया अपनाये बिना नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति की गयी है. इसके बावजूद सरकार को उन शिक्षकों के व्यवहार से आलोचना का सामना करना पड़ा है.
उन्होंने कहा कि सरकार के पास लगातार उन शिक्षकों के विद्यालय नहीं आने और अयोग्य होने की शिकायतें मिलती रही हैं. मंत्री ने नियोजित शिक्षकों की वेतनमान की मांग को जायज नहीं ठहराया है. उन्होंने कहा कि सरकार की वित्तीय स्थिति इस लायक नहीं है कि उन्हें वेतनमान दिया जाये. उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे इस तरह की मांग न करें. उन्होंने बताया कि अगले सत्र से राज्य के प्लस टू विद्यालयों में कृषि विषय की पढ़ाई होगी. दो सौ राज्य के माध्यमिक विद्यालयों में सरकार ने व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई चालू करने पर सहमति जतायी है. शाही ने कहा कि राज्य के प्रारंभिक से लेकर माध्यमिक विद्यालयों में पांच वर्षो के लिए संविदा पर शिक्षक रखे जायेंगे.
सरकार ने शिक्षकों की उम्र सीमा 60 से बढ़ाने की मांग को देखते हुए यह मन बनाया है. इसके तहत साठ साल में रिटायर होने वाले शिक्षकों को रिटायरमेंट के बाद और पांच वर्षो के लिए ठेके पर रखा जायेगा. मंत्री ने कहा कि सरकार उनके अनुभव का लाभ लेने और ट्रेंड शिक्षकों की कमी को पाटने की दिशा में यह फैसला लेने जा रही है. महिला शिक्षकों के मनचाहा स्थानांतरण के बारे में पूछे गये सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि 23 जिलों में स्थानांतरण में कोई परेशानी नहीं है. पन्द्रह जिलों में अभ्यर्थी से कम सीट रहने के कारण यह संकट है. सरकार आने वाले समय में रास्ता निकालेगी.
उन्होंने बताया कि राज्य के चुनिंदा 19 महाविद्यालयों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की योजना है. इस निमित्त सर्वप्रथम उक्त महाविद्यालयों में चहारदिवारी निर्माण, पुस्तकालय तथा प्रयोगशालाओं के विकास,जीर्ण-शीर्ण भवनों का जीर्णोद्धार तथा पुस्तकों की खरीद हेतु राशि स्वीकृति की जा रही है. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के वित्तीय प्रबंधन तथा पारदर्शिता को बेहतर लेखा संधारण तथा बेहतर लेखा अभिलेख संधारण की व्यवस्था मजबूत की जा रही है. राज्य में विश्वविद्यालय के परीक्षाओं के सफल संचालन हेतु जिले में अलग से परीक्षा भवन निर्माण की योजना है. इसमें से 20 जिलों के लिए राशि भी स्वीकृत किया जा चुकी है. मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर के स्वयंसेवी संस्था अक्षय पात्रा को बिहार में मिड डे मील उपलब्ध कराने के लिए कार्य आवंटित किया गया है. इसके लिए कैबिनेट से अनुमोदन प्राप्त हो चुका है. उन्होंने बताया कि गैस आधारित कुकिंग के माध्यम से मिड डे मील तैयार करने हेतु पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चार जिलों पटना, मुजफ्फरपुर, जहानाबाद एवं पूर्णिया को चुना गया है.