भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार माने जा रहे नरेंद्र मोदी रविवार को कांग्रेस और मनमोहन सरकार पर जमकर बरसे।
हल्ला बोलने वाले अंदाज में नमो ने कहा, 'अपनी अगुवाई वाली सरकार के भ्रष्टाचार व बेकाबू महंगाई को लेकर कांग्रेस गहरे संकट में फंसी है। लिहाजा नाकामियों से ध्यान हटाने को वह एकबार फिर धर्मनिरपेक्षता रूपी बुर्के में छिप गई है। लेकिन इस बार उसकी दाल गलने वाली नहीं है। लोग झांसे में नहीं आएंगे।'
मोदी पुणे में रविवार शाम को भाजपा की एक रैली को संबोधित कर रहे थे। कांग्रेस की गेम चेंजर खाद्य सुरक्षा योजना पर सवालिया निशान लगाते हुए उन्होंने कहा, 'गरीबी हटाओ के नाम पर इस पार्टी ने वर्षो तक लोगों को मूर्ख बनाया है। अब कागज का एक पर्चा लेकर कांग्रेसी ऐसे दावे कर रहे हैं मानो लोगों की थाली में भोजन परोस दिया हो। सच्चाई यह है कि सिर्फ कानून बनाने से खाना नहीं मिलने वाला है।' नमो ने इस रैली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर भी भरपूर निशाना साधा। उनका कहना था, 'वह देश को विनाश के रास्ते पर ले जा रहे हैं। डॉलर के मुकाबले जिस रफ्तार से रुपये की कीमत गिर रही है, ऐसा लगता है जल्द ही यह पीएम की उम्र के बराबर पहुंच जाएगी।'
गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा कि रुपये की कीमत इसलिए गिर रही है क्योंकि दिल्ली की सरकार में बैठे लोग लूट-खसोट में मस्त हैं। कांग्रेस में राहुल गांधी को अहम जिम्मेदार सौंपने पर भी मोदी हमलावर रहे। बकौल नमो, 'देश की सभी समस्याओं की जड़ में कांग्रेस की वंशवाद की राजनीति है। इस खानदानी राजनीति से देश को छुटकारा दिलाने का समय आ गया है।'
उन्होंने कहा कि वर्तमान में कांग्रेस भ्रष्टाचार, महंगाई, न्यायपालिका के हस्तक्षेप, नीतिगत अपंगता और लोगों में बढ़ती असुरक्षा की भावना को लेकर बेहद परेशान है। लिहाजा उसने धर्मनिरपेक्षता का कार्ड खेल दिया है। ताकि लोग गरीबी, बेकारी और अन्य समस्याओं पर चर्चा छोड़कर केवल धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे पर ही चर्चा में मशगूल हो जाएं।
मोदी के अनुसार अपनी नाकामियों से बचने के लिए कांग्रेस फिर धर्मनिरपेक्षता का नकाब ओढ़कर बंकर में जा छिपी है। इससे पूर्व दिन में नमो एतिहासिक फर्ग्यूसन कॉलेज में छात्रों से मुखातिब थे। जहां उन्होंने कांग्रेस सांसद सुरेश कलमाड़ी के गृह नगर से राष्ट्रमंडल खेल घोटाले का मुद्दा भी जोरशोर से उठाया। आरोप लगाया कि इस घोटाले ने दुनिया की नजरों में देश की इज्जत मिट्टी में मिला दी।
सत्ता को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए मोदी ने कहा, 'हमारे और दूसरे लोगों के बीच काफी फर्क है। वे सत्ता के भूखे हैं जबकि हम देश के हर नागरिक का सशक्तीकरण चाहते हैं।' उन्होंने मौजूदा शिक्षा प्रणाली के औचित्य पर भी सवाल उठाया।
हल्ला बोलने वाले अंदाज में नमो ने कहा, 'अपनी अगुवाई वाली सरकार के भ्रष्टाचार व बेकाबू महंगाई को लेकर कांग्रेस गहरे संकट में फंसी है। लिहाजा नाकामियों से ध्यान हटाने को वह एकबार फिर धर्मनिरपेक्षता रूपी बुर्के में छिप गई है। लेकिन इस बार उसकी दाल गलने वाली नहीं है। लोग झांसे में नहीं आएंगे।'
मोदी पुणे में रविवार शाम को भाजपा की एक रैली को संबोधित कर रहे थे। कांग्रेस की गेम चेंजर खाद्य सुरक्षा योजना पर सवालिया निशान लगाते हुए उन्होंने कहा, 'गरीबी हटाओ के नाम पर इस पार्टी ने वर्षो तक लोगों को मूर्ख बनाया है। अब कागज का एक पर्चा लेकर कांग्रेसी ऐसे दावे कर रहे हैं मानो लोगों की थाली में भोजन परोस दिया हो। सच्चाई यह है कि सिर्फ कानून बनाने से खाना नहीं मिलने वाला है।' नमो ने इस रैली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर भी भरपूर निशाना साधा। उनका कहना था, 'वह देश को विनाश के रास्ते पर ले जा रहे हैं। डॉलर के मुकाबले जिस रफ्तार से रुपये की कीमत गिर रही है, ऐसा लगता है जल्द ही यह पीएम की उम्र के बराबर पहुंच जाएगी।'
गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा कि रुपये की कीमत इसलिए गिर रही है क्योंकि दिल्ली की सरकार में बैठे लोग लूट-खसोट में मस्त हैं। कांग्रेस में राहुल गांधी को अहम जिम्मेदार सौंपने पर भी मोदी हमलावर रहे। बकौल नमो, 'देश की सभी समस्याओं की जड़ में कांग्रेस की वंशवाद की राजनीति है। इस खानदानी राजनीति से देश को छुटकारा दिलाने का समय आ गया है।'
उन्होंने कहा कि वर्तमान में कांग्रेस भ्रष्टाचार, महंगाई, न्यायपालिका के हस्तक्षेप, नीतिगत अपंगता और लोगों में बढ़ती असुरक्षा की भावना को लेकर बेहद परेशान है। लिहाजा उसने धर्मनिरपेक्षता का कार्ड खेल दिया है। ताकि लोग गरीबी, बेकारी और अन्य समस्याओं पर चर्चा छोड़कर केवल धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे पर ही चर्चा में मशगूल हो जाएं।
मोदी के अनुसार अपनी नाकामियों से बचने के लिए कांग्रेस फिर धर्मनिरपेक्षता का नकाब ओढ़कर बंकर में जा छिपी है। इससे पूर्व दिन में नमो एतिहासिक फर्ग्यूसन कॉलेज में छात्रों से मुखातिब थे। जहां उन्होंने कांग्रेस सांसद सुरेश कलमाड़ी के गृह नगर से राष्ट्रमंडल खेल घोटाले का मुद्दा भी जोरशोर से उठाया। आरोप लगाया कि इस घोटाले ने दुनिया की नजरों में देश की इज्जत मिट्टी में मिला दी।
सत्ता को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए मोदी ने कहा, 'हमारे और दूसरे लोगों के बीच काफी फर्क है। वे सत्ता के भूखे हैं जबकि हम देश के हर नागरिक का सशक्तीकरण चाहते हैं।' उन्होंने मौजूदा शिक्षा प्रणाली के औचित्य पर भी सवाल उठाया।