गांधी के जिस हथियार
(अनशन) का सहारा लेकर अन्ना हजारे ने कई सरकारों को झुकाया है, अन्ना के
गांव में एक शिक्षक ने इस हथियार का इस्तेमाल उन्हीं के खिलाफ कर दिया है।
रालेगण सिद्धि में गांधी जयंती के दिन एक टीचर शरद मापारी अन्ना के खिलाफ
अनशन पर बैठ गए। उनके साथ बड़ी संख्या में गांव वाले भी थे। रालेगण सिद्धि
ग्राम पंचायत के आश्वसन पर शरद ने अनशन तोड़ा।
रालेगण सिद्धि में अन्ना हजारे द्वारा स्थापित संत यादव बाबा शिक्षण संस्थान में शरद बतौर अस्थायी टीचर काम करते थे। पिछले महीने उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। शरद के मुताबिक उन्हें नौकरी से निकाले जाने का कारण भी नहीं बताया गया। शरद ने इस बारे में गांव के कई लोगों और अन्ना से भी बातचीत की। जब उन्हें कोई आश्वासन नहीं मिला, तो उन्होंने अनशन पर बैठने का निर्णय लिया।
2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर शरद यादव बाबा मंदिर के सामने अनशन पर बैठ गए। गौरतलब है कि यादव बाबा मंदिर में ही अन्ना हजारे रहते हैं। शरद के अनशन पर बैठने के बाद अन्ना ने उनकी शिकायत सुनी। फिर आनन-फानन रालेगण ग्राम पंचायत की बैठक बुलाई गई। बैठक के बाद गांव वालों ने शरद को आश्वसन दिया कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा। आश्वसन मिलने के बाद शरद ने अनशन तोड़ा। शरद के साथ बड़ी संख्या में गांव वाले भी अनशन पर बैठे थे।
रालेगण सिद्धि में अन्ना हजारे द्वारा स्थापित संत यादव बाबा शिक्षण संस्थान में शरद बतौर अस्थायी टीचर काम करते थे। पिछले महीने उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। शरद के मुताबिक उन्हें नौकरी से निकाले जाने का कारण भी नहीं बताया गया। शरद ने इस बारे में गांव के कई लोगों और अन्ना से भी बातचीत की। जब उन्हें कोई आश्वासन नहीं मिला, तो उन्होंने अनशन पर बैठने का निर्णय लिया।
2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर शरद यादव बाबा मंदिर के सामने अनशन पर बैठ गए। गौरतलब है कि यादव बाबा मंदिर में ही अन्ना हजारे रहते हैं। शरद के अनशन पर बैठने के बाद अन्ना ने उनकी शिकायत सुनी। फिर आनन-फानन रालेगण ग्राम पंचायत की बैठक बुलाई गई। बैठक के बाद गांव वालों ने शरद को आश्वसन दिया कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा। आश्वसन मिलने के बाद शरद ने अनशन तोड़ा। शरद के साथ बड़ी संख्या में गांव वाले भी अनशन पर बैठे थे।