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झारखंड से बिहार को मिलेगा ढाई हजार करोड़

बिहार और झारखंड के बीच कर्मचारियों के पेंशन को लेकर जारी विवाद पर केंद्र सरकार का फैसला आ गया है। इसकी प्रति गृह विभाग को पहुंच गई है। निर्णय बिहार सरकार के पक्ष में है। इसके अनुसार झारखंड सरकार बिहार सरकार को कर्मचारियों के बकाया पेंशन मद में 20584 करोड़ रुपये अदा करेगी।
देनदारी का निर्धारण कर्मचारियों की संख्या के
आधार पर तय किया गया है। पेंशन का बोझ झारखंड सरकार कर्मचारियों की संख्या के आधार पर उठाए या जनसंख्या के आधार पर इसको लेकर एक दशक से अधिक से दोनों राज्यों के बीच विवाद चल रहा था। झारखंड सरकार बिहार सरकार के तर्क को नहीं मान रही थी। इस सिलसिले में अधिकारियों के स्तर पर कई राउंड की हुई वार्ता का नतीजा नहीं निकल पाया था। 2009 में ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम से झारखंड से पेंशन राशि दिलवाने का अनुरोध किया था। उस समय झारखंड पर बिहार सरकार के फार्मूले के हिसाब से दावेदारी 1669 करोड़ थी जो अब बढ़कर करीब ढाई हजार करोड़ हो गई है।
विवाद का मुद्दा
बिहार पुनर्गठन अधिनियम 2000 के तहत राज्यकर्मियों के पेंशन भुगतान पर दोनों राज्यों की देनदारी बनती है। केन्द्रीय फार्मूले के अनुसार बिहार व झारखंड के बीच कर्मियों का विभाजन 2:1 के अनुपात में हुआ और इसी आधार पर राज्य सरकार पेंशन राशि के बंटवारा भी चाहती है। उधर झारखंड सरकार कर्मियों के बदले आबादी के आधार पर अदायगी की जिम्मेदारी लेना चाहती थी। इस हिसाब से पेंशन राशि के बंटवारे का आधार 3:1 होता है।
करीब छह साल पूर्व रांची में बिहार और झारखंड के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में सहमति बनी थी कि अंतिम निर्णय होने तक झारखंड अपने ही फार्मूले के आधार पर बिहार के हिस्से की जो राशि (629 करोड़) बनती है, उसका भुगतान कर दे। झारखंड इस पर सहमत भी हो गया था लेकिन बाद में मामला अटक गया। पेंशन विवाद को लेकर झारखंड सरकार सर्वोच्च न्यायालय गई हुई है। इस बीच इसी साल मार्च में पेंशन मद में झारखंड सरकार ने 50 करोड़ बिहार को अदा भी किया है।