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राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के अवसर पर मदन अहल्या महिला महाविद्यालय में हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी

राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के अवसर पर मदन अहल्या महिला महाविद्यालय में  हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी

राजेश कनोडिया, नवगछिया। राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के अवसर पर हिन्दी विभाग, मदन अहल्या महिला महाविद्यालय तथा आइक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में ‘डिजिटल दुनिया में हिन्दी: इंस्ट्राग्राम से लेकर संसद तक’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों को अंगवस्त्र से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह तथा प्राचार्य डॉ. अवधेश रजक के अध्यक्षमंडल ने की। मंच–संचालन डॉ. धर्मेन्द्र दास तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ.आरती कुमारी ने किया। 
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता प्रो. हितेंद्र पटेल (रवींद्र भारती विश्वविद्यालय, कलकत्ता) ने कहा कि डिजिटल युग में हिन्दी ही नहीं तमाम भाषा के स्वरूप में बदलाव आया है। भाषा अर्थ ग्रहण करने की नई क्षमता विकसित करती है। डिजिटल युग में हिन्दी का लोकतांत्रिकरण हुआ है। कहने का अर्थ है कि समाज का नेतृत्व उन्हीं के हाथ में होता है जिनके हाथों में भाषा होती है। लेकिन सामाजिक नेतृत्व के हाथों से भाषा जनसामान्य के हाथों में आई है, यह हमने हाल के देशव्यापी आंदोलनों में देखा। कैसे एक सामान्य–सा नौजवान भाषा और डिजिटल माध्यम के उपयोग से लाखों का समर्थन जुटा लेता है। इसलिए मैं कहता हूँ कि भाषा स्वाधीन हो गई है। उस पर अब विशिष्ट वर्ग का नियंत्रण नहीं रहा। शब्दों के अर्थांतरण हो रहे हैं। अब भाषा में साधारण व्यक्ति भी प्रभाव उत्पन्न कर सकता है। इंस्टाग्राम से चलकर संसद तक एक अनुगूँज पैदा हुई है। किन्तु आज भाषा का जो रूप निकल कर आ रहा है उसे यदि बचाना चाहते हैं तो भाषा में विश्वास पैदा करना होगा। विश्वनीयता के संकट को दूर करना होगा। अनुभव या कहें स्मृति को बचाना होगा। क्योंकि जब हम बोलते हैं तो स्मृति भी बोलती है लेकिन अब भाषा पर तात्कालिकता का बहुत दवाब है, वह एक संकट है। हमें अपनी भाषा में अपने अनुभवों को लाने का प्रयास करना होगा जिससे भाषा के भीतर एक वृहत् सामूहिकता का विकास हो। भाषा के साथ नए–नए तरीकों जुड़ना होगा। भारत में हिन्दी भाषा की सम्भावनाएँ सबसे अधिक है। 
वहीं विशिष्ट वक्ता डॉ.अभय कुमार (मुंगेर विश्वविद्यालय) ने कहा कि निश्चित ही डिजिटल युग ने भाषा और संस्कृति को प्रभावित किया है। लेकिन यह भी सत्य है कि भाषाओं ने डिजिटल दुनिया का निर्माण किया है। डिजिटल दुनिया भाषाओं पर आश्रित है। वर्तमान समय में भाषा शास्त्र और अकादमिक दायरों से निकल कर आम आदमी के हाथों में जाती हुई दिखती है। इसलिए इस भाषा को बचाने और समृद्ध करने के लिए उसके व्याकरण की कठोरता को प्राथमिकता देने के बजाए संवेदनाओं की भाषा बनाने पर जोर देना होगा। भाषाएँ जब जनसंवेदना से अधिक व्याकरण को महत्व देती हैं तो वह मरती भी है। इसका उदाहरण हिब्रू और संस्कृत है। इसलिए भाषा में अंतर्निहित सामाजिक वर्चस्व को भी समझना होगा। आमजन की हिन्दी और हिन्दी के आमजन को बचाना होगा! 

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो.अवधेश रजक ने कहा कि हमें हिन्दी को हर स्तर पर आत्मसात करना होगा। हम जिस भी विभाग में कार्यरत हों वहाँ हिन्दी के सहज–सुलभ स्वरूप का अधिकाधिक प्रयोग करें। हिन्दी हमारी अस्मिता की प्रतीक है। 

वहीं हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ.अमरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में हिन्दी हमें एक सूत्र में पिरोती है। हिन्दी हमारी आत्मा को प्रकाशित करने वाली भाषा है। हिन्दी का वर्तमान और भविष्य उज्ज्वल है। डॉ. अमलेन्दु (टी. एन.बी कॉलेज) ने कहा कि इंस्टाग्राम ने जनशक्ति में इजाफा तो किया है किन्तु हमारी युवा पीढ़ी की ऊर्जा के क्षय में भी इसकी भूमिका कम नहीं है। इंस्टाग्राम हो अथवा अन्य सोशल मिडिया प्लेटफॉर्म हमें इसका इस्तेमाल करते हुए अनुशासित रहने की आवश्यकता है। इन सोशल मिडिया प्लेटफॉर्म्स को जनोपयोगी बनाना होगा। इससे हमारी हिन्दी का बल भी बढ़ेगा।

मंच–संचालन करते हुए राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक डॉ. धर्मेन्द्र दास ने कहा कि डिजिटल युग में हिन्दी ने खुद को पुनराविष्कृत किया है। यह देखना सुखद है कि हिन्दी अपनी परंपरा से कटे बगैर युगीन बदलावों को आत्मसात करते हुए आगे बढ़ रही है। भारत में हिन्दी डिजिटल युग का नेतृत्व कर रही है। 

मौके पर डॉ.रमेश मोहन शर्मा ‘आत्मविश्वास’ ने कहा कि हिन्दी की सुदीर्घ परंपरा रही है। इस परम्परा के गौरव को बनाए रखते हुए उसे युगानुरूप विकसित करना होगा।

इस अवसर पर डॉ.अन्तर्यामी कुमार अधिश्वर, मधुमति कुमारी, अवधेश मंडल, नीलू कुमारी, सुनीता कुमारी, हरेन्द्र कुमार, उदिता यादव, हिमांशु, देवेंद्र शर्मा, डॉ.राहुल कुमार, हिमांशु मिश्रा, सुभाष मंडल, अंशु अमन,सन्नी कुमार समेत बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित थीं।