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नवगछिया में सम्पन्न हुआ विश्व जल संकट पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार


विश्व जल संकट पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार गुरुवार को नवगछिया स्थित जीबी कालेज में सम्पन्न हुआ । जहां देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालय से वैज्ञानिक तथा रसायनविद लोगों ने भाग लिया। साथ ही जल संकट के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रोजेक्ट के साथ अपने अपने व्याख्यान दिये।
जिसके तहत यह बात सामने आयी कि जल अब किसी भी देश के जीवन की महत्वपूर्ण संपदा है। इस जल संपदा के स्रोत को बचाये रखना आवश्यक है। जिसके समाप्त हो जाने के बाद मानव जीवन के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो जाएगा। इसलिए जल की प्रत्येक बूंद का बुद्धिमत्तापूर्ण पूर्ण उपयोग आवश्यक है।
इस राष्ट्रीय सेमिनार के संयोजक प्रो0 अशोक कुमार झा के अनुसार यहा पहुंचे सभी रसायनविद और वैज्ञानिकों के व्याख्यान के तहत मूल रूप से यह निष्कर्ष माना गया कि जल संकट को रोकने के लिये कोई नयी वैज्ञानिक एवं तकनीकि पद्धति विकसित की जाय। साथ ही फसल उत्पादन में कम से कम खाद और कीटनाशक के साथ कम से कम जल का उयपयोग हो । इसके अलावा गंदे और अशुद्ध जल को उपयोगी बनाने के लिये हर छोटे छोटे जगहों पर जल शुद्धिकरण संयंत्र आविलम्ब लगाना चाहिये।
इस मौके पर इंडियन केमिकल सोसाइटी के प्रो0 सोमनाथ सानयाल, विश्व भारती शांति निकेतन के प्रो0 भावतोष मंडल, शोध छात्रा भाव्या, छात्र मिलन वर्मन, टीएनबी कालेज के प्रो0 डॉ ज्योतिन्द्र चौधरी, रांची के डॉ अमरदीप, नवगछिया के डॉ डीके दास, प्रो0 फिरोज अहमद, राजेश कानोडिया आदि ने जल की समस्या और निदान पर चर्चा की।