पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' ने नरेंद्र मोदी का नाम अयोध्या में राम मंदिर के नाम पर हुए दंगों से भी जोड़ा है। अखबार ने अयोध्या से फाइल की गई रिपोर्ट में बताया है कि भारत के मुसलमानों की इच्छा यही है कि नरेंद्र मोदी को छोड़ कर कोई भी पीएम बन जाए। अखबार के मुताबिक, भारत के कई मुसलमानों को यह डर है कि अगर मोदी पीएम बने तो हालात बेहद खतरनाक हो सकते हैं। एडम प्लोराइट और एनी बनर्जी की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि गुजरात में 2002 में हुए दंगों के कारण अयोध्या प्रकरण के बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा में मोदी की भूमिका नजरअंदाज कर दी गई है। लेकिन, मोदी ही वह शख्स हैं जिन्होंने राम मंदिर के लिए आयोजित आडवाणी की रथयात्रा की व्यवस्था की थी। ज्यादातर मुसलमानों से बातचीत पर आधारित इस रिपोर्ट में समाचार एजेंसी एएफपी के हवाले से विश्व हिंदू परिषद के शरद शर्मा का एक बयान भी दिया गया है। शर्मा के मुताबिक, 'अगर हिंदू पार्टी को बहुमत मिलता है तो हम संसद में कानून पारित कर राम का जन्मस्थान हिंदुओं के हवाले किए जाने की मांग करेंगे।'
नरेंद्र मोदी यूपी में वाराणसी (और गुजरात में वडोदरा) से चुनाव लड़ रहे हैं। वाराणसी संसदीय सीट पर ब्राह्मण मतदाता करीब 2.5 लाख तो पटेल व वैश्य मतदाताओं की संख्या दो-दो लाख है और यादव मतदाताओं की संख्या एक लाख है।
लेकिन, वाराणसी के करीब तीन लाख मुस्लिम मतदाता अगर एकजुट होकर वोट कर दें तो चुनाव परिणाम बदल सकते हैं।
'आप' के अरविंद केजरीवाल और समाजवादी पार्टी के कैलाश चौरसिया वाराणसी से मैदान में हैं। दोनों मानते हैं कि उन्हें हिंदुओं क साथ मुस्लिम मतदाताओं का भी समर्थन मिलेगा। कांग्रेस तो मुस्लिमों को अपना परंपरागत वोटर मानती ही है। बहुजन समाज पार्टी भी दलितों, पिछड़ों के साथ मुस्लिमों को जोड़कर अपना भविष्य देख रही है। चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने के लिए कौमी एकता दल के विधायक मुख्तार अंसारी भी मैदान में आ गए हैं।
