राजेश कानोडिया, नवगछिया।
जी हाँ ! यह नवगछिया का वही वर्षों पुराना अनुमंडलीय अस्पताल है । जिसकी पहचान का यहा कोई बोर्ड नहीं दिखता। जहां इस अस्पताल के उपाधीक्षक पद पर डॉ0 बीपी मंडल (डॉ0 बासुदेव प्रसाद मंडल) वर्षों से कुंडली मार कर बैठे हैं। जिनपर भागलपुर के सिविल सर्जन तक के आदेश का कोई असर तक नहीं होता है। कई बार कई तरह के आरोप भी लगे परंतु कोई परवाह नहीं। गलत जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के कारण गवाही में शिमला तक जाना पड़ा तो कोई गम नहीं।
इस अस्पताल का आलम यह है कि यहाँ एक नहीं दो-दो ब्लड बैंक खुले। लेकिन दोनों में से एक को भी चालू तक नहीं किया जा सका। जिसमें से एक को आईसीटीसी (एड्स कंट्रोल सोसाइटी) द्वारा स्थापित किया गया था। दूसरा एचडीएफ़सी बैंक द्वारा बिहार सरकार से एग्रीमेंट कराकर दिया गया था। जिसके लिए ए ग्रेड की दो नर्स तथा दो लैब टेक्निसियन भेजा गया था। स्थानीय उदासीनता के कारण उसे वापस जाना पड़ा।
इस अनुमंडलीय अस्पताल में एक्स रे, एचआईवी (एड्स) और बलगम जांच के अलावा किसी तरह की जांच की कोई सुविधा है ही नहीं। डोयन द्वारा जांच की सुविधा तो एक साल से अधिक समय से बंद पड़ी है।
यहाँ अवस्थित 102 नम्बर की एम्बुलेंस सेवा भी 1 जनवरी 2014 की रात 9 बजे से डीजल के अभाव में बंद है। जिसके ड्राइवर ने भी 8 माह का वेतन नहीं मिलने के कारण हड़ताल कर दी है। जिसके फलस्वरूप यहाँ का एम्बुलेंस शेड भी खाली पड़ा है। पुरानी मारुति एम्बुलेंस भवन के बाहर जरूर खड़ी है। जो उपाधीक्षक की मर्जी से ही हिल सकती है।
जी हाँ ! यह नवगछिया का वही वर्षों पुराना अनुमंडलीय अस्पताल है । जिसकी पहचान का यहा कोई बोर्ड नहीं दिखता। जहां इस अस्पताल के उपाधीक्षक पद पर डॉ0 बीपी मंडल (डॉ0 बासुदेव प्रसाद मंडल) वर्षों से कुंडली मार कर बैठे हैं। जिनपर भागलपुर के सिविल सर्जन तक के आदेश का कोई असर तक नहीं होता है। कई बार कई तरह के आरोप भी लगे परंतु कोई परवाह नहीं। गलत जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के कारण गवाही में शिमला तक जाना पड़ा तो कोई गम नहीं।
इस अस्पताल का आलम यह है कि यहाँ एक नहीं दो-दो ब्लड बैंक खुले। लेकिन दोनों में से एक को भी चालू तक नहीं किया जा सका। जिसमें से एक को आईसीटीसी (एड्स कंट्रोल सोसाइटी) द्वारा स्थापित किया गया था। दूसरा एचडीएफ़सी बैंक द्वारा बिहार सरकार से एग्रीमेंट कराकर दिया गया था। जिसके लिए ए ग्रेड की दो नर्स तथा दो लैब टेक्निसियन भेजा गया था। स्थानीय उदासीनता के कारण उसे वापस जाना पड़ा।
इस अनुमंडलीय अस्पताल में एक्स रे, एचआईवी (एड्स) और बलगम जांच के अलावा किसी तरह की जांच की कोई सुविधा है ही नहीं। डोयन द्वारा जांच की सुविधा तो एक साल से अधिक समय से बंद पड़ी है।
यहाँ अवस्थित 102 नम्बर की एम्बुलेंस सेवा भी 1 जनवरी 2014 की रात 9 बजे से डीजल के अभाव में बंद है। जिसके ड्राइवर ने भी 8 माह का वेतन नहीं मिलने के कारण हड़ताल कर दी है। जिसके फलस्वरूप यहाँ का एम्बुलेंस शेड भी खाली पड़ा है। पुरानी मारुति एम्बुलेंस भवन के बाहर जरूर खड़ी है। जो उपाधीक्षक की मर्जी से ही हिल सकती है।