नौ जुलाई 2012 : प्रीतम भट्टाचार्य का नवगछिया स्टेशन से अपहरण
10 जुलाई 2012 : नवगछिया और आपपास के सभी थानों को प्रीतम के परिजनों द्वारा दी जाती है सूचना. पुलिस हरकत में आती है.
11 जुलाई 2012 : प्रीतम के परिजन पहुंचते हैं नवगछिया
12 जुलाई 2012 : प्रीतम के चाचा राम मोहन भट्टाचार्य के लिखित आवेदन पर नवगछिया थाने में दर्ज किया गया मामला
14 जुलाई 2012 : प्रीतम के मोबाइल का मिला लोकेशन, नवगछिया शहर में लोकल पुलिस और रेल पुलिस के स्तर से किया गया मार्च पास्ट
15 जुलाई 2012 : नवगछिया रेल थाना के कटरिया ओवरब्रिज के नीचे प्रीतम का सिरकटा शव मिला
16 जुलाई 2012 : अलग अलग रेल थाने के नेतृत्व में पुलिस ने किया दस टीमों को सक्रिय
20 जुलाई 2012 : अनुसंधान को दिशा देने के लिए नवगछिया पहुंचे रेल एडीजी पीएन राय
21 जुलाई 2012 : उड.ी अफवाह कि 40 हजार रुपये के लिए की गयी प्रीतम की हत्या. पुलिस पदाधिकारियों ने की मामले की जांच, तो झूठी निकली बात
22 जुलाई 2012 : नहीं मिली कोई सफलता, एडीजी पीएन राय के निर्देश पर विशेष जांच टीम का किया गया गठन
24 जुलाई 2012 : नवगछिया रेल थानाध्यक्ष व दो पुलिस कर्मी लापरवाही के आरोप में निलंबित. उन पर आरोप था कि बैग छिनतई की रपट लिखाने थाने पहुंचे प्रीतम को पुलिस ने डांट कर भगा दिया.
25 जुलाई 2012 : कटरिया रेल ओवरब्रिज के नीचे घटना स्थल से 300 मीटर की दूरी पर मिला प्रीतम का बैग और कपड.ा.
26 जुलाई 2012 : रेल एडीजी फिर पहुंचे नवगछिया, दी गयी अनुसंधान को नयी दिशा
चार अगस्त 2012 : पुलिस ने किया सुराग मिलने का दावा. छट्ठ सहनी का नाम सामने आया. पुलिस ने छट्ठ के घर और आस पास के ठिकानों पर की छापेमारी. छट्ठ भगोड.ा घोषित.
आठ अगस्त 2012 : गिरफ्तार हुआ घोषित भगौड.ा नवगछिया का मक्खातकिया निवासी छट्ठू सहनी. फिर एक एक कर कुछ आरोपियों ने किया आत्मसर्मपण तो कुछ को पुलिस ने किया गिरफ्तार
26 दिसंबर 2012 : तीन आरोपियों को पुलिस ने लिया रिमांड पर, कराया गया पॉलीग्राफिक टेस्ट
नौ जनवरी 2013 : पुलिस ने कथित रूप से प्रयुक्त बोलेरो को किया जब्त और नवगछिया के बनवारी पंसारी की अंडी मिल की फोरेंसिक एक्सपर्ट से करायी गयी जांच
पांच फरवरी 2013 : पुलिस इस हत्याकांड में कुल नौ लोगों को जेल भेज चुकी थी. छह के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका था.
11 दिसंबर 2013 : पुलिस का अनुसंधान कानूनी रूप से आरोपियों का दोष सिद्ध नहीं करवा पाया. सभी आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी.
