दिल्ली के
चर्चित तंदूर कांड में दोषी ठहराए गए सुशील शर्मा की फांसी की सजा को
सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। अदालत ने माना कि सुशील
ने अपनी पत्नी नैना साहनी की हत्या भावावेश में की थी। इसके लिए उसने पहले
से कोई योजना नहीं बनाई थी। गौरतलब है कि 1995 में यूथ कांग्रेस नेता सुशील
शर्मा ने नैना साहनी की गोली मार कर हत्या कर दी थी। फिर लाश के
टुकड़े-टुकड़े करके तंदूर में जला दिया था। सुशील शर्मा को दोषी ठहराते हुए
निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी जिसे हाईकोर्ट ने बरकरार रखा था।
जुलाई
1995 के तंदूर कांड से पूरा देश सिहर उठा था। दिल्ली में काफी रौब रखने
वाले यूथ कांग्रेस नेता सुशील शर्मा ने अपनी पत्नी नैना साहनी की पहले गोली
मारकर हत्या की। फिर लाश के टुकड़े-टुकड़े कर उन्हें एक रेस्टोरेंट के
तंदूर में डालकर फूंक दिया। सुशील ने नैना साहनी से प्रेम विवाह किया था पर
अवैध संबंधों के शक ने उसे पागल बना दिया था। बाहरहाल, सुशील शर्मा की
करतूत छिप नहीं सकी। वो पकड़ा गया।
इस
घिनौने हत्याकांड के खिलाफ देश भर में तूफान खड़ा हो गया। हर तरफ से उसे
फांसी देने की मांग उठने लगी। आखिरकार निचली अदालत ने सुशील शर्मा को फांसी
की सजा सुना दी। फिर हाईकोर्ट ने भी इस पर मुहर लगा दी। लेकिन 18 साल बाद,
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुशील शर्मा को बड़ी राहत दे दी। सुप्रीम
कोर्ट ने मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने
फैसले में विस्तार से उन दुर्लभतम स्थितियों पर विचार किया जिनमें फांसी
दी जा सकती है। उसके बाद कोर्ट ने माना कि सुशील शर्मा ने लाश के
टुकड़े-टुकड़े कर उसे जलाया जो बहुत ही घिनौना अपराध है। दोषी को ऐसी सजा
मिलनी चाहिए जो समाज में एक नजीर साबित हो।
कोर्ट
ने माना कि सुशील शर्मा अपनी पत्नी से काफी प्यार करता था और उस पर अपना
हक समझता था। जब उसे पोस्टमार्टम के वक्त अस्पताल ले जाया गया तो वो
फूट-फूट कर रोने लगा। शायद उसे अपनी गलती का अहसास था। नैना साहनी की हत्या
भावावेश में की गई। इसके लिए कोई साजिश नहीं रची गई थी। जेल में रहने के
दौरान उसका चाल चलन अच्छा रहा है। सुशील शर्मा के खिलाफ कोई दूसरा आपराधिक
मामला नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए सुशील
शर्मा की फांसी की सजा माफ की जाती है और उम्र कैद की सजा सुनाई जाती है।
लेकिन
कोर्ट ने ये नहीं कहा कि सुशील शर्मा को आखिरी सांस तक जेल में रहना
पड़ेगा। यानी सामान्य कानूनी प्रावधानों के तहत सरकार कोई फैसला कर सकती
है। सुशील शर्मा के वकील सुदर्शन राजन के मुताबिक कोर्ट ने कहा है के अगर
सरकार चाहे तो चौदह साल बाद उसकी सजा को ख़त्म कर सकती है। सुशील शर्मा 18
साल जेल में गुजार चुका है। जाहिर है, अब वो अपनी रिहाई के लिए सरकार से
गुहार लगा सकता है।
