सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाले मामले में लालू प्रसाद यादव को पांच साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही लालू पर 25 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। जबकि जगन्नाथ मिश्र को 4 साल की सजा मिली है। चाईबासा ट्रेजरी से अवैध निकासी के मामले में सोमवार को लालू समेत 38 लोगों को दोषी करार दिया गया था।
चारा घोटाले में दोषी करार लालू यादव की सजा पर बहस रांची की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में सुबह पूरी हो गई थी। अदालत ने दोपहर 2.30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जेल में ही लालू को सजा सुनाने का ऐलान किया था। कोर्ट में बहस के दौरान दोनों ही पक्ष के वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें रखी हैं। लालू के वकील ने कम सजा देने की मांग करते हुए तर्क दिया कि लालू की उम्र 67 साल है और उन्हें कई बीमारियां हैं। रेल मंत्री के तौर पर लालू ने बेहतरीन काम किया है। लालू ने जांच में पूरा सहयोग किया था। लालू के ही आदेश के बाद 41 एफआईआर दर्ज की गई। लालू ने जांच एजेंसियों को सभी दस्तावेज मुहैया कराए। इसलिए लालू को कम सजा देने पर विचार किया जाए।
वहीं सीबीआई की तरफ से दलील दी गई कि ये सामान्य केस नहीं है, लालू बड़े पद पर रहे हैं, उनसे ऐसी उम्मीद नहीं है। इस केस में पहले ही काफी देर हो चुकी है, लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए कड़ी सजा देना जरूरी है।
पहली बार वीडियो कांफ्रेंसिंग से सजा का ऐलान
ये ऐतिहासिक फैसला रांची की बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में बंद लालू यादव समेत बाकी सभी दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनाया गया। झारखंड में ये पहली बार हुआ जब कोई फैसला इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के जरिए सुनाया गया। शायद देश में भी ऐसा पहली बार हुआ जब लालू जैसे हाई प्रोफाइल नेता को वीडियो लिंक के जरिए फैसला सुनाया गया। आपको बता दें कि देशभर की जेलों और जिला अदालतों को जोड़ने के लिए चलाए जा रहे प्रोजेक्ट के तहत रांची की सिविल कोर्ट को भी टेली कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा मिली है। आने वाले समय में देशी की लगभग 300 जेलों और दो हजार अदालतों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जोड़ा जाना है।
पूर्व मुख्यमंत्री, सांसद और आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव अब कैदी नंबर 3312 बन चुके हैं। सजा के ऐलान के साथ ही वो पूर्व सांसद बन जाएंगे। लालू यादव को चारा घोटाले के एक मामले में सहयोगी होने का दोषी पाया गया है। इस मामले में लालू, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा औऱ जेडीयू सांसद जगदीश शर्मा समेत 38 लोग दोषी हैं।
चारा घोटाले का ये मामला चाईबासा ट्रेजरी से जुड़ा है। इसमें कागजों पर पशुओं के लिए फर्जी चारा दिखाकर 37 करोड़ 68 लाख रुपए अवैध रुप से निकाले गए थे। इसमें पशुपालन विभाग के अधिकारी, सप्लायर, आईएएस अफसर समेत कई राजनेताओं के नाम भी सामने आए। लालू यादव पर अन्य धाराओं सहित पूरे षडयंत्र में शामिल होने, फ्रुाच्वाड़ा और भ्रष्टाचार का मामला साबित हुआ है।
उधर लालू का परिवार और पाटच् पूरे मामले को राजनीतिक साजिश का नतीजा बता रहे हैं। लालू को कितनी सजा मिलेगी इस पर उनका औऱ उनकी पार्टी का राजनीतिक भविष्य निर्भर करता है। लालू के समर्थक ये दावा तो कर रहे हैं कि आने वाले चुनावों में लालू को वोटरों की सहानुभूति मिलेगी लेकिन लोगों से सीधा संपर्क टूटना दरअसल चुनावी राजनीति में बड़ी व्यवहारिक चुनौती बन सकता है।
