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पीएम की जापान यात्रा आज से

प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की सोमवार से शुरू हो रही जापान यात्रा के दौरान भारत और जापान आपसी हितों को मजबूत करने, व्यापार बढ़ाने और सुरक्षा के मुद्दे पर जोर देंगे. दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा, हाइ स्पीड रेल तकनीक और
इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर आगे बातचीत होने की संभावना है. हाल के वर्षो में जापान और भारत के संबंध बहुत ही गहरे हुए हैं और दोनों देश एक दूसरे को ग्लोबल पार्टनर के रूप में देख रहे हैं. जापान एशिया का नंबर दो और भारत नंबर तीन आर्थिक ताकत बन कर उभरा है. अभी भारत और जापान के बीच 17.5 बिलियन डॉलर का व्यापार हो रहा है.
भारत चाहता है कि यह व्यापार और बढ़े. साथ ही भारतीय उत्पादों के लिए जापान का बाजार और खुले ताकि व्यापार संतुलन बना रहे. प्रधानमंत्री की तीन दिवसीय जापान यात्रा में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिव शंकर मेनन और प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पुलक चटर्जी भी होंगे. सोमवार सुबह 10 बजे प्रधानमंत्री विशेष विमान से नयी दिल्ली से तोक्यो के लिए रवाना होंगे. 27 मई से 29 मई तक जापान में रहने के बाद प्रधानमंत्री 30 मई को थाईलैंड के लिए रवाना हो जायेंगे. अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे के साथ वार्षिक सम्मेलन में वार्ता करेंगे. इससे पहले प्रधानमंत्री जापान चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंड्रस्ट्री द्वारा आयोजित बिजनेस मीट को संबोधित करेंगे.
शाम में पीएम जापान-इंडिया एसोसिएशन, जापान-इंडिया पार्लियामेंट्री फ्रेंड्सशिप लीग और फ्र्रेंडशिप एक्सचेंज काउंसिल द्वारा आयोजित बैठक को संबोधित करेंगे. वे जापान के प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं से भी मुलाकात करेंगे. दूसरे दिन प्रधानमंत्री के सम्मान में जापान के राजा-रानी द्वारा आयोजित भोज में डॉ मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी गुरुशरण कौर शामिल होंगी.
2000 से जापान और भारत के बीच संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं. जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री योशिरो मोरी और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने नयी दिल्ली में ग्लोबल पार्टनरशिप इन 21 सेंचुरी पर सहमति व्यक्त करते हुए संबंधों का द्वार खोला था. यह संबंध लगातार बढ़ता गया. स्थिति यह है कि 2006 से भारत और जापान हर साल वार्षिक सम्मेलन करते हैं. रूस के बाद जापान दूसरा ऐसा देश है जिसके साथ भारत वार्षिक सम्मेलन करता है.
जापान भी भारत को बेहतर सहयोगी के रूप में देखता है. इसका उदाहरण है कि पिछले एक दशक में जापान ने ऑफिशियल डेवलपमेंट असिसटेंस (ओडीए) से सबसे ज्यादा सहायता भारत को दी है. 2003-04 से लेकर 2012 तक भारत जापान से 35 बिलियन डॉलर की सहायता पा चुका है. जापान की सहायता से भारत में 59 प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिस पर जापान ने लगभग 12 बिलियन डॉलर का लोन दिया है. 2008 में मंदी के दौरान जब जापान की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा गयी थी और वह दुनिया की दूसरी आर्थिक ताकत से तीसरे स्थान पर पहुंच गया, उसके बावजूद उसने भारत की सहायता जारी रखी.
जापान ने नयी दिल्ली में मेट्रो रेल परियोजना के लिए आर्थिक और तकनीकी सहायता दी है. भारत अब उम्मीद कर रहा है कि प्रस्तावित दिल्ली-मुंबई इंड्रस्ट्रीयल कॉरिडोर प्रोजेक्ट को जापान की सहायता मिलेगी. लगभग 75 बिलियन डॉलर का यह प्रोजेक्ट दोनों देशों की प्राथमिकता में है. वार्ता में इस प्रोजेक्ट पर कुछ निर्णय होने के आसार हैं.