सरकार और श्रम संगठनों के बीच वार्ता असफल हो जाने के बाद श्रम संगठनों की
बुधवार से प्रस्तावित दो दिनों के भारत बंद का रास्ता करीब-करीब साफ हो
गया है।
राष्ट्रव्यापी भारत बंद का आह्वान देश के पंजीकृत 11 श्रम संगठनों ने किया है। श्रम श्रंगठनों ने दलगत
राजनीति से ऊपर उठते हुए दो दिनों के हड़ताल का आह्वान किया है। यूपीए सकार की जनविरोधी नीतियों एवं महंगाई के खिलाफ श्रम संगठनों की यह हड़ताल मंगलवार आधीरात से शुरू होगी।
ट्रेड यूनियनों ने कहा कि रक्षा मंत्री ए के एंटनी की अध्यक्षता वाली समिति उन्हें कोई ठोस प्रस्ताव देने में विफल रही और उनकी ओर से रखी गई एक भी मांग को उसने स्वीकार नहीं किया।
इंटक अध्यक्ष जी संजीव रेड्डी ने संवाददाताओं से कहा, ‘हड़ताल जारी है। वे सिर्फ समय मांग रहे हैं। वे कह रहे हैं कि वे मांगों का अध्ययन करेंगे और बाद में उचित जवाब देंगे या आवश्यक कार्रवाई करेंगे। हमने कहा कि यह संभव नहीं है। श्रमिकों की मांगों पर कुछ ठोस फैसला होना चाहिए।’
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को मजदूर संघों से अपनी हड़ताल वापस ले लेने की अपील की थी क्योंकि इससे अर्थव्यवस्था को नुकसान होने के अलावा लोगों को असुविधा होगी। इसके साथ ही उन्होंने बातचीत की पेशकश की थी।
राष्ट्रव्यापी भारत बंद का आह्वान देश के पंजीकृत 11 श्रम संगठनों ने किया है। श्रम श्रंगठनों ने दलगत
राजनीति से ऊपर उठते हुए दो दिनों के हड़ताल का आह्वान किया है। यूपीए सकार की जनविरोधी नीतियों एवं महंगाई के खिलाफ श्रम संगठनों की यह हड़ताल मंगलवार आधीरात से शुरू होगी।
ट्रेड यूनियनों ने कहा कि रक्षा मंत्री ए के एंटनी की अध्यक्षता वाली समिति उन्हें कोई ठोस प्रस्ताव देने में विफल रही और उनकी ओर से रखी गई एक भी मांग को उसने स्वीकार नहीं किया।
इंटक अध्यक्ष जी संजीव रेड्डी ने संवाददाताओं से कहा, ‘हड़ताल जारी है। वे सिर्फ समय मांग रहे हैं। वे कह रहे हैं कि वे मांगों का अध्ययन करेंगे और बाद में उचित जवाब देंगे या आवश्यक कार्रवाई करेंगे। हमने कहा कि यह संभव नहीं है। श्रमिकों की मांगों पर कुछ ठोस फैसला होना चाहिए।’
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को मजदूर संघों से अपनी हड़ताल वापस ले लेने की अपील की थी क्योंकि इससे अर्थव्यवस्था को नुकसान होने के अलावा लोगों को असुविधा होगी। इसके साथ ही उन्होंने बातचीत की पेशकश की थी।
