लेते हैं? यह जानने के लिए रजनीश आनंद ने अमेरिका और वेनेनजुला में बसे एक-एक भारतीय परिवार से संपर्क किया.
अमेरिका में बसा परिवार मूलत: पटना का है जबकि वेनेनजुला में बसा परिवार रांची का है. मणिवर्षा नारायण और असिता शेखर बुद्धाकॉलोनी, पटनावासी अधिवक्ता जवाहर प्रसाद कर्ण की बेटियां हैं और फिलहाल अमेरिका में रह रही हैं.
वहीं इंदुमती द्विवेदी करम टोली, रांची निवासी अंबिका दत्त द्विवेदी की पुत्री हैं और वेनेजुला में रह रही हैं.उनके पति अंजनि कुमार सहाय भी रांची वासी हैं. उनका परिवार पहले बरियातु हाउसिंग कॉलोनी रांची में रहता था. इनदोनों की शिक्षा-दीक्षा भी रांची में ही हुई है.
मणि वर्षा नारायण : मणि वर्षा नारायण पिछले दो साल से अमेरिका में रह रहीं हैं. न्यूयार्क में रहने वाली मणिवर्षा कहती हैं कि अपनों की कमी तो खलती ही है, लेकिन यहां रहनेवाले सभी भारतीय साथ मिलकर दीपावली का आनंद उठाते हैं. यहां दीपावली की पूजा मंदिर में ही होती है. इसके लिए 25 डॉलर देना पडता है. तब मंदिर के पंडित पूजा करवाते हैं.
बहुत मजा आता है. लेकिन मैं जहां रहती हूं वहां पटाखे जलाने पर पाबंदी है. इसलिए मैं पटाखों को मिस करती हूं. इस बार मैं घर में रंगोली बनाऊंगी और उनपर दीये सजाऊंगी. बेटे के लिए गिफ्ट और कपडे खरीदूंगी और मन से पूजा करूंगी.
इंदुमती द्विवेदी : इंदुमती रांची की रहने वाली हैं. शादी के बाद वह अपने पति अंजनि कुमार सहाय,जो एक आईएएस अधिकारी हैं के साथ विदेश चली गयीं हैं. फिलहाल यह परिवार अपनी दो बच्चियों के साथ वेनेनजुला की राजधानी काराकस में रह रहा है.
वह बताती हैं कि यहां भारतीयों की संख्या काफी कम है. भारतीय दूतावास के अलावा वहां 30-35 परिवार ही भारतीयों के हैं. इसलिए दीपावली की धूम वैसी नहीं होती जैसी अपने देश में. इस बार धनतेरस के दिन सब ने भारतीय दूतावास में इकट्ठे पूजा की.
भारतीय राजदूत स्मिता पुरुषोत्तम ने 17 तारीख को सभी भारतीयों और कुछ स्थानीय नागरिकों को भी अपने घर पर बुलाया है. वहां सबमिलकर दीपावली मनायेंगे. फिर आतिशबाजी, डांस, भारतीय सिनेमा और भारतीय खाने का भी प्रोग्रामहै.