युगों से मानवीय मूल्यों की परंपरा का निर्वहन करते हुए लोगों द्वारा
मंगलवार को देवी के रूप में कन्याओं की अराधना की जाएगी। नवरात्र में
कुमारी कन्याओं का भोज एवं पूजन करने का विशेष महत्व है। मां भगवती के नौ
दिनों के उपासना व्रत का अंतिम पड़ाव आज समाप्त हो रहा है। इन नौ दिनों में
भक्तों ने मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की उपासना की है।
कन्या पूजन कर भोज कराने वाला ज्ञान, बल, धन व निरोगता का अधिकारी बनता है। इस बाबत ज्योतिषाचार्य पंडित शिव शंकर ठाकुर का कहना है कि कुमारी कन्या पूजन व भोज अष्टमी व नवमी तिथि को करने का प्रावधान है। इन नौ कन्याओं के रूपों में कुंवारी,
त्रिमूिर्त्त, कल्याणी, रोहिणी, कालिका, चण्डिका, शाम्भवी, दुर्गा व सुभद्रा है। इस कन्या भोज में शामिल चार वर्णो की कन्याओं का अलग-अलग महत्व है। ब्राह्माण कन्या से ज्ञान, क्षत्रिय कन्या से बल, वैश्य कन्या से धन व शुद्र कन्या से निरोगता की प्राप्ति होती है। उन्हीं मां की अराधना में आज कन्याओं को देवी रूप में पूजा जाएगा।
कन्या पूजन कर भोज कराने वाला ज्ञान, बल, धन व निरोगता का अधिकारी बनता है। इस बाबत ज्योतिषाचार्य पंडित शिव शंकर ठाकुर का कहना है कि कुमारी कन्या पूजन व भोज अष्टमी व नवमी तिथि को करने का प्रावधान है। इन नौ कन्याओं के रूपों में कुंवारी,
त्रिमूिर्त्त, कल्याणी, रोहिणी, कालिका, चण्डिका, शाम्भवी, दुर्गा व सुभद्रा है। इस कन्या भोज में शामिल चार वर्णो की कन्याओं का अलग-अलग महत्व है। ब्राह्माण कन्या से ज्ञान, क्षत्रिय कन्या से बल, वैश्य कन्या से धन व शुद्र कन्या से निरोगता की प्राप्ति होती है। उन्हीं मां की अराधना में आज कन्याओं को देवी रूप में पूजा जाएगा।
