नवरात्रों में मां के दर्शनों की एक झलक पाने के लिए ही मंदिरों में सुबह ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारे लगनी शुरू हो जाती है। मंदिरों के बाहर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ जाता है। नवरात्र के चतुर्थ दिन मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना की जाती है। सोलह कलाओं से युक्त होने के कारण दुर्गा देवी को कूष्मांडा व षोड़शी मां के नाम से भी जाना जाता है। चतुर्थ नवरात्र करने से मां की सिद्धि व करुणा प्राप्त होती है। मां के चतुर्थ रूप को मनोहर रूपवाली माना जाता है। मां के नवरात्र करने से हर व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण होती है।
ज्योतिषि पंडित शिव शंकर ठाकुर ने बताया कि मां के चतुर्थ रूप को कूष्मांडा व षोड़शी मां के नाम से भी जाना जाता है। मां के इस रूप की पूजा करने से
बुद्धि का विकास होता है। इसके साथ-साथ घर में सुख-शांति का आगमन होता है। उन्होंने बताया कि इस दिन मां के मंत्र का जाप करना चाहिए, मंत्र का जाप करने से शत्रु पक्ष कमजोर होता है। मां के इस रूप की पूजा करने से राहु, शनिदेव के प्रकोप से भी छुटकारा पाया जा सकता है।
उन्होंने मां के रूप के बारे में बताया कि कूष्मांडा का यश सूर्य की भांति लाल वर्ण से युक्त, देवी षोड़शी तीन नेत्र व अष्ट भुजाओं वाली होती है। उन्होंने बताया कि उनकी कांति ह्दय को सुख देने वाली होती है। उन्होंने बताया कि मां सदाशिव पर स्थित कमलासन पर देवी विराजमान होती है। मां की भुजाओं में पाश, धनुष, अंकुश व बाण है। उन्होंने बताया कि मां कूष्मांडा की पूजा करने से सभी भक्तों के दुख दूर होते है, घर में सुख व संतान की प्राप्ती होती है। उन्होंने बताया कि मां के आठ भुजा होने के कारण ये अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात है।
चतुर्थ दिन के नवरात्र का मां का ध्यान मंत्र
सुरा संपूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च, दघानां हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा, शुभदास्तु में। ज्योतिषि मनोज दूबे ने बताया कि मंत्र का उच्चारण करने से मनोकामना पूर्ण होती है। व घर में सुख शांति आती है। उन्होंने बताया कि इसके साथ घर में दोनों समय मां की आरती भी करनी चाहिए।
ज्योतिषि पंडित शिव शंकर ठाकुर ने बताया कि मां के चतुर्थ रूप को कूष्मांडा व षोड़शी मां के नाम से भी जाना जाता है। मां के इस रूप की पूजा करने से
बुद्धि का विकास होता है। इसके साथ-साथ घर में सुख-शांति का आगमन होता है। उन्होंने बताया कि इस दिन मां के मंत्र का जाप करना चाहिए, मंत्र का जाप करने से शत्रु पक्ष कमजोर होता है। मां के इस रूप की पूजा करने से राहु, शनिदेव के प्रकोप से भी छुटकारा पाया जा सकता है।
उन्होंने मां के रूप के बारे में बताया कि कूष्मांडा का यश सूर्य की भांति लाल वर्ण से युक्त, देवी षोड़शी तीन नेत्र व अष्ट भुजाओं वाली होती है। उन्होंने बताया कि उनकी कांति ह्दय को सुख देने वाली होती है। उन्होंने बताया कि मां सदाशिव पर स्थित कमलासन पर देवी विराजमान होती है। मां की भुजाओं में पाश, धनुष, अंकुश व बाण है। उन्होंने बताया कि मां कूष्मांडा की पूजा करने से सभी भक्तों के दुख दूर होते है, घर में सुख व संतान की प्राप्ती होती है। उन्होंने बताया कि मां के आठ भुजा होने के कारण ये अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात है।
चतुर्थ दिन के नवरात्र का मां का ध्यान मंत्र
सुरा संपूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च, दघानां हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा, शुभदास्तु में। ज्योतिषि मनोज दूबे ने बताया कि मंत्र का उच्चारण करने से मनोकामना पूर्ण होती है। व घर में सुख शांति आती है। उन्होंने बताया कि इसके साथ घर में दोनों समय मां की आरती भी करनी चाहिए।