दियारा क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए करारी तिनटंगा गांव में आजादी से पूर्व ही एक स्कूल महिपाल राजकीय उच्च बुनियादी विद्यालय की स्थापना की गई थी। ताकि दियारा इलाकों में भी शिक्षा की ज्योति जलाई जा सके। लेकिन पिछले एक दशक से सरकार एवं शिक्षा विभाग के उदासीन रवैया के कारण यहां नामांकित छात्रों का भविष्य अंधेरे में है। विद्यालय में कक्षा एक से लेकर आठ तक में छात्रों की कुल संख्या हजार से अधिक है। पर इसे विद्यालय का दुर्भाग्य ही कहें कि इन बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी महज चार शिक्षकों के कंधे पर है। मजबूरन एक ही वर्ग में दो वर्गो का संचालन करना पड़ता है। विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक दिनेश कुमार का कहना है कि विद्यालय में वे एक मात्र ऐसे शिक्षक है जिनकी नियुक्ति यहां है। शेष तीन शिक्षक दूसरे विद्यालय से प्रतिनियुक्ति पर हैं। विद्यालय में लड़कियों की संख्या ज्यादा है। गांव के मुखिया नवरत्न कुमार एवं सरपंच शंभू यादव बताते हैं कि शिक्षक नहीं रहने से विद्यालय की पढ़ाई व्यवस्था चरमरा गई है। विद्यालय के प्रभारी अक्सर विभागीय काम-काज से बाहर रहते हैं। ऐसे में महज तीन शिक्षकों के ऊपर पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हम लोगों ने कई बार जिला शिक्षा पदाधिकारी से लेकर प्रधान सचिव तक की विद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की। लेकिन आज तक विद्यालय में किसी शिक्षक की नियुक्ति नहीं हुई। छात्रों का कहना है किविद्यालय से छात्रवृत्ति एवं पोशाक राशि तो मिलती है। पर शिक्षा ही नहीं मिलती। इस बाबत जिला शिक्षा पदाधिकारी मधूसूदन पासवान ने कहा कि कई बार शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विभाग से आदेश मांगा गया है। लेकिन आदेश नहीं आता है, जब तक आदेश नहीं मिलता हम वहां शिक्षक बहाल नहीं कर सकते हैं।