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मक्कांचल किसानों के सपने बिखरे


राजेश कानोडिया / नवगछिया , संवाद सहयोगी ।
पूरब में कटरिया से लेकर पश्चिम के नारायणपुर तक तथा उत्तर में कोसी पार से लेकर दक्षिण के गंगा किनारे तक नवगछिया अनुमंडल के फैले विशाल भू भाग में मक्का की खेती यहाँ के किसान वर्षों से करते आये हैं। अपनी मेहनत के बल पर यहाँ के किसानों ने मक्का के क्षेत्र में नवगछिया का नाम पुरे देश में प्रसिद्द कर रक्खा है। तभी तो मक्का की सीजन में बड़ी बड़ी कंपनियों के लोग सीधे नवगछिया से माल मंगाने को उतावले रहते हैं। रोजाना अनगिनत ट्रकों से मक्का का विभिन्न राज्यों तथा विदेश को निर्यात भी किया जाता है। लेकिन नवगछिया के मक्का किसान इस बार खून के आंसू रो रहे हैं। फसल देख कर उनका कलेजा बैठ रहा है। सारे सपने बिखर रहे हैं, अरमानों पर पानी फिर गया ।
हर साल की तरह अच्छी फसल होने का सपना संजोये इन किसानों ने क्या - क्या अरमान पाल रखे थे कोई क्या जाने। इतना तो जरुर था की महाजनों का कर्ज तो चुकाना ही था, बिटिया की शादी भी करनी ही थी। इस बार की फसल ने तो पिछले सारे रिकार्ड तोड़ डाले । देहतोड़ मेहनत के बल पर फसल तो बहुत अच्छी हुयी, मगर फसल में मक्का के दाने ही गायब रहे। इस मामले में पांच बीघा खेत में मक्का की खेती करने वाले झल्लू दास टोला के किसान जय प्रकाश शर्मा खेत में बताते हैं की खेत तो हरा भरा है, गाछ भी बढियां है, भुट्टा भी देखने में बढियां है, लेकिन छूने और खोल कर देखने पर दाना नजर नहीं आता है तो कलेजा बैठने लगता है। स्थिति यहाँ तक है की मजदुर भी अब खेत में लगी फसल को काटने को तैयार नहीं हो रहे। लाचारी खाद पानी से सींच कर तैयार फसल को अपने हाथों काट कर खेत में ही गिराना होगा। जबकि इसके लिए कावेरी ५० , ९०८१, ३० भी ९२, सी पी ८०८ जैसे प्रमाणित बीज ही उपयोग में लाये गए थे । बीज, खाद, पानी, मजूरी में लगभग चौवालिस हजार खर्च हुआ था। जिसका आधा लागत भी ऊपर होने की सम्भावना नजर नहीं आ रही है। इसलिए अब मक्का की खेती से मोह तो भंग हो ही गया है सब सपना चकना चूर हो गया । चिंता है तो कर्ज के भुगतान की और भविष्य की। इसी तरह की बात साहू परबत्ता के किसान कमल किशोर साहू, राम कुमार साहू भी बताते हैं. यही हाल इस क्षेत्र के सैकड़ों किसानों का है। . भाकपा माले के बिन्देश्वरी मंडल इसके लिए सीधे तौर पर बिहार सरकार को जिम्मेवार मानते हैं. जन प्रतिनिधि को कोई चिंता ही नजर नहीं आ रही है। उनके द्वारा आवेदन को बीडी के यहाँ जमा करने कहा जा रहा है। बिहार सरकार द्वारा मदद का आश्वासन मिला है।
अनुमंडल पदाधिकारी कपिल देव महतो ने बताया की सभी प्रखंडों में मक्का खेतों की जांच कृषि वैज्ञानिकों द्वारा की गयी है। जिसकी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी जाएगी ।