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रामनवमी पर स्वामी आगमानंद ने बताया - संतों की कृपा भगवान की कृपा से भी बड़ी होती है

रामनवमी पर स्वामी आगमानंद ने बताया - संतों की कृपा भगवान की कृपा से भी बड़ी होती है
नव-बिहार समाचार, नवगछिया /सहरसा। संतों की कृपा हो तो भगवान को भी कृपा कर दें। संत सबों के हैं उनका अपना घर परिवार नहीं होता है। समस्त जन मानस ही उनका परिवार है। क्योंकि संतों की कृपा भगवान की कृपा से बड़ी होती है। इसलिए जब-जब जीव के जीवन में संकट आए तो उन्हें संतों के चरणों में रखा जाना चाहिए। क्योंकि संतों की कृपा से हर संकट को ताला जा सकता है और संतों की कृपा से ही भगवान की प्राप्ति होती है। 
स्वामी जी ने भगवान श्री राम के जन्मोत्सव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पूरी दुनिया में रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव घर-घर में लोग धूमधाम से मना रहे हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम भगवान विष्णु के नवीनतम अवतार हैं। 
जिन्होंने 'रघुकुल रीत सदा चले आई, प्राण पर वचन न जाय' का पालन किया। इसलिए भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। क्योंकि उन्होंने कभी भी, कहीं भी, जीवन में मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया। माता-पिता और गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए वे 'क्यों' शब्द को कभी भी मुख पर नहीं देखते। ऐसे में वे एक आदर्श पुत्र, शिष्य, भाई, पति, पिता और राजा बने। जिनके राज्य में प्रजा सुख-समृद्धि से निरपेक्ष थी।उपरोक्त बातें परमहंस स्वामी आगमानद जी महाराज ने अपने मुखारविंद से आशीर्वचन देते हुए कहा। अंत में स्वामी जी जन कल्याण के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए सभी को आशीर्वाद दिया।
मौका था उत्तरतोताद्रि मठ विभीषणकुंड अयोध्या के उत्तराधिकारी एवं श्रीशिवशक्ति योग पीठ नवगछिया के पीठाधीश्वर संत शिरोमणि परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज का अवतरण उत्सव काफी उत्साह पूर्वक और धूमधाम से मनाने का। जो सहरसा कॉलेज, सहरसा के मैदान में श्री शिवशक्ति योग पीठ नवगछिया के तत्वाधान में आयोजित भव्य तीन दिवसीय अवतरणोत्सव के तीसरे दिन स्वामी जी के अनुयाईयों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भव्य धर्म मंच एवं भव्य पंडाल का निर्माण किया गया था। वहीं प्रथम चरण में योगासन, वेदी पूजन किया गया। जिसके बाद परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज के आगमन पर अनुयायो एवं भक्तों के गाजे-बाजे के साथ स्वामी जी को रथ पर सवार होकर वर्षा करते हुए मंच पर चढ़ाया गया। तत्पश्चात योगपीठ के विद्वान पंडित अंशेंद्र झा, अनिरुद्ध शास्त्री, मनमोहन झा, कपीश, हरिनारायण के साथ गुरु धाम एवं विभिन्न स्थानों से पहुंचे पंडित एवं आचार्य के वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गुरू पूजन, पादुका पूजन के साथ 56 स्वाद का भोग लगाया गया। 
मौके पर योग पीठ से जुड़े नामचीन कलाकारों द्वारा एक से बढ़ा एक भजन की प्रस्तुति दी गई। वहीं मानस कोकिला कृष्ण दीदी, भजन सम्राट डॉ दीपक मिश्रा, हिमांशु, प्रो डॉ ज्योतिचंद्र चौधरी, प्रो नृपेंद्र वर्मा, मृत्युंजय सिंह गंगा ने गुरू की महिमा एवं भगवान श्रीराम के चरित्र का वर्णन किया। जबकि बनारस से प्रसिद्ध कथावाचक हीरामणि ने भी संगीत के साथ भगवान श्रीराम एवं जी के जन्मोत्सव पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही दिव्यांश कला केंद्र भागलपुर के छात्रों ने छात्राओं के नृत्य नाटक प्रस्तुत किए।