नव-बिहार समाचार, भागलपुर। क्षेत्रीय लोक भाषा अंगिका को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग तेज हो गयी है। रविवार को अंगिका को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने को लेकर बिहार के भागलपुर जिले के सैंडिस कंपाउंड में ‘अंगिका मानव श्रृंखला’ बनायी गयी। इस मानव श्रृंखला में राजनीतिक पार्टी, सामाजिक संस्था, सांस्कृतिक संस्थान, व्यापारी, छात्रों समेत समाज के हर तबके के लोग शामिल हुए।
जहां कोई अंगिका और अंग के समर्थन में नारे लगा रहा था, तो किसी ने बैनर-पोस्टर के माध्यम से अपनी भावनाओं को जाहिर किया। मानव श्रृंखला में शामिल लोगों ने एलान किया कि यह पहला चरण है। आगे भी अपनी आवाज बुलंद करने के लिए सड़कों पर उतरेंगे। भागलपुर जिले में ‘अंगिका भाषा’ के लिए लोग हाथ से हाथ थाम कर खड़े होंगे। सवाल अंगिका भाषा के अधिकार का है। कार्यक्रम का नेतृत्व अंगिका मानव श्रृंखला तैयारी समिति संरक्षक लखनलाल पाठक ने किया।
कार्यक्रम में शामिल नगर विधायक अजीत शर्मा ने कहा 'अंगिका भाषा को सरकार आठवीं अनुसूची में मान्यता प्रदान करे, इसके लिए मानव श्रृंखला बनायी गयी है। हमारी भाषा सबसे पुरानी है। इसको सम्मान मिलना ही चाहिए। आज मैदान में कतार में लोग खड़े हुए हैं, आगे सड़क से लेकर पूरे जिले में यह कार्यक्रम किया जायेगा।' वहीं समिति के संरक्षक लखन लाल पाठक ने मौके पर कहा कि ‘पहली बार अंगिका भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए भागलपुर के लोगों ने एकजुटता का प्रदर्शन किया है, यह हमारी पहली अंगड़ाई है। अंग प्रदेश की भाषा, साहित्य-सभ्यता, संस्कृति, लोक कला, लोक गाथा और विरासत की अस्मिता और अस्तित्व के लिए हम किसी भी स्तर तक की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं।' इधर, डॉ. अमरेंद्र ने कहा कि ‘अंगिका हमारी सबसे प्राचीन भाषा है। अब, अंगिका को आठवीं सूची में स्थान देना ही होगा।’
मानव श्रृंखला के संयोजक गौतम सुमन ने कहा कि अंगिका की लड़ाई अब जनांदोलन बन चुकी है। यह प्रमाणित करता है कि संघर्ष करते रहें, तो लोग मिलेंगे, कारवां बनता जायेगा। लोगों की एकजुटता जरूर रंग लायेगी। प्रोफेसर मधुसूदन झा ने कहा कि ‘अंगिका को विश्वविद्यालय में छात्र पढ़ रहे हैं अब, इस भाषा को स्कूली स्तर से लेकर सरकारी कार्यालय तक लाना होगा। जब तक यह कार्य नहीं हो जाता है, तब तक हमारा विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।’ लोगों ने एलान किया कि ‘अंगिका भाषा को सरकार को वाजिब हक देना ही होगा। इसके लिए आगे भी हमारा संघर्ष जारी रहेगा।’ मानव श्रृंखला को सफल बनाने में संदीप लाल, डॉ. वीरेंद्र कुमार, डॉ. संजय सिंह, डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. साकेत बिहारी शरण, अधिवक्ता वीरेश मिश्रा, कुमकुम द्विवेदी, अरुणिमा सिंह, श्वेता सिंह, सुजाता कुमारी समेत अन्य की अहम भूमिका रही।