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सोमवार, 27 मार्च 2017

आधार कार्ड से मिले मिड डे मील खाने वाले 4.4 लाख ‘भूत’

पटना : जैसे जैसे आधार कार्ड अनिवार्य होता जा रहा है. वैसे ही इसकी मदद से बड़े- बड़े घोटालों का खुलासा भी हो रहा है.  सरकार ने जैसे ही मिड डे मील के लिए आधार अनिवार्य किया तो चौंकाने वाले खुलासे भी सामने आने लगे हैं. 

मामला झारखंड, मणिपुर और आंध्र प्रदेश का है जहां के स्कूलों में मिड डे मील में भारी अनियमितता की बात सामने आई है. दरअसल, घोटालेबाजों की जुगत से सिर्फ कागजों पर ही बच्चे खाना खा रहे थे. या यूँ कहें कि12 अंकों की आधार संख्या से झारखंड, मणिपुर और आंध्र प्रदेश के स्कूलों में 4.4 लाख भूत ढूंढ लिए हैं. इनके लिए सरकार मिड डे मील योजना के तहत पैसे भेज रही थी, लेकिन ये ‘बच्चे’ सिर्फ कागजों पर ही थे.

मिड-डे मील स्कीम के तहत सरकार कक्षा एक से कक्षा आठ के छात्रों के लिए मुफ्त में दोपहर का भोजन देती है. इस महीने, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) ने छात्रों के लिए मिड-डे मील प्राप्त करने के लिए अद्वितीय पहचान संख्या अनिवार्य कर दी है. इस कदम का विरोध करते हुए कुछ कार्यकर्ताओं ने दावा किया था कि इस कदम से कई लाभार्थी बाल पोषण योजना से बाहर हो जाएंगे.

हालांकि, एचआरडी मंत्रालय को तीन राज्यों द्वारा साल 2015-16 और 2016-17 के साझा किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि कई सरकारी स्कूल मिड-डे मील स्कीम से अतिरिक्त फंड पाने के लिए बच्चों के फर्जी नाम स्कूल के रजिस्टर में जोड़ रहे थे. उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश ने अपने सभी 29 लाख सरकारी विद्यालयों के बच्चों को आधार के साथ जोड़ा था.

तब पता चला कि स्कूलों में 2.1 लाख बच्चे, महज कागज पर ही अस्तित्व में थे. एक अधिकारी ने कहा कि विसंगति को सरकार के नोटिस के लिए लाए जाने के बाद उनका नामांकन रद्द कर दिया गया था. हम अभी भी राज्यों से डेटा को सम्मिलित करने की प्रक्रिया में हैं. एचआरडी के एक अधिकारी ने कहा कि सभी राज्यों के आंकड़ों आने के बाद स्कूलों में पढ़ने वाले फर्जी छात्रों की संख्या बढ़ सकती है. 

झारखंड में 2.2 लाख गैर-मौजूद छात्रों के नाम विद्यालय के रिकॉर्ड से हटा दिए गए हैं. अब तक, राज्य के सरकारी स्कूलों में दाखिला पाने वाले 48 लाख विद्यार्थियों में से 89 फीसद को आधार संख्या मिल गई है. मणिपुर विद्यालयों में 1,500 फर्जी छात्रों का होना पाया गया.

भारत के अधिकांश राज्य मध्य-दिवसीय भोजन योजना के लिए 40:60 अनुपात में केंद्र के साथ वित्तीय भार को उठाते हैं. पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अनुपात 90:10 है. भारत में 11.5 लाख स्कूलों में 13.16 करोड़ बच्चों का दाखिला है, जिनमें से साल 2015 में 16.03 करोड़ छात्रों ने मिड डे मील योजना का लाभ उठाया. मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि हम अभी तक फर्जी लाभार्थियों के उन्मूलन से बचाए गए पैसे की गणना नहीं कर रहे हैं.

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