राजेश कानोडिया, नवगछिया।
कोसी ऊपर से जितनी शांत दिखती है अंदर से उतनी ही तेज रहती है। इस क्षेत्र की राजनीति भी कोसी की धारा के समान ही चलती है। जो ऊपर से कुछ और अंदर से कुछ होती है। यही कारण है कि इस बार के लोकसभा चुनाव के दौरान भागलपुर में भी कोसी का ही असर दिखा। पूरे देश भर में भले ही मोदी की सुनामी लहर चली हो, लेकिन कोसी क्षेत्र में कहीं नहीं चली मोदी की सुनामी लहर ।
चाहे कटिहार हो या पूर्णिया, या फिर मधेपुरा हो अररिया या हो सुपौल और खगड़िया अथवा किशनगंज । इसके साथ साथ भागलपुर जिले में भी कोसी की धारा बहती है। उसी कोसी की धारा का असर भागलपुर में भी दिखायी दिया । जहां भागलपुर शहर के लोग तो भाजपा को लीड दिलाये थे, लेकिन कोसी क्षेत्र के लोगों ने उनकी नहीं चलने दी। नतीजा सामने आ ही गया और भाजपा के कद्दावर नेता कहे जाने वाले राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज़ हुसैन को हार का मुँह देखना पड़ा।
यदि सही मायने में देखा जाय तो यहाँ चली भाजपा विरोधी कोसी की अपनी लहर । जिसको हवा दे रहे थे बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार। जहां वे स्वयं कैम्प कर रहे थे। इसी दौरान नितीश कुमार ने भागलपुर जिले के कोसी नदी किनारे कदवा में एक सभा भी की थी। उसी क्रम में अपने विधायक और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से मंत्रणा भी । उसी का नतीजा निकला कि भागलपुर सहित बिहार के पूरे कोसी क्षेत्र से मोदी की सुनामी लहर को नितीश कुमार ने मोड दिया । जिसका परिणाम निकला कि कोसी में एक भी सीट पर भाजपा का भगवा नहीं फहर सका। पूर्णिया में जदयू ने जीत दर्ज कर ही ली।
मधेपुरा में तो भाजपा को तीसरे नम्बर पर संतोष करना पड़ा। जहां से नितीश कुमार अपने नेता शरद यादव को जीता तो नहीं पाये लेकिन भाजपा को भी जीतने नहीं दिये। यही हाल रहा कटिहार, पूर्णिया और अररिया का भी । जहां पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा का कब्जा था। साथ ही इन क्षेत्रों से भी भाजपा की जीत पक्की मानी जा रही थी।
