मोदी लहर में बिहार में जनता दल यूनाइटेड को मिली करारी हार का असर सामने आ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। नीतीश ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। जिसे राज्यपाल ने मंजूर भी कर लिया है।
नीतीश
ने लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद इस्तीफा देने का फैसला किया। बीजेपी
से गठबंधन टूटने की कीमत जेडीयू को चुकानी पड़ी है। उसे सिर्फ 2 सीटें ही
मिली हैं। यहां तक कि शरद यादव भी पप्पू यादव के हाथों हार झेलनी पड़ी है।
पार्टी की फजीहत देख नीतीश ने इस्तीफा देने का फैसला कर लिया।
इस्तीफा
सौंपने के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि बिहार में पार्टी के चुनाव
अभियान का नेतृत्व कर रहा था। परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं होने के कारण
इसकी नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा सौंप दिया है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया है विधानसभा भंग करने की
सिफारिश नहीं की है।
भारतीय
जनता पार्टी से अलग होने के फैसले को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा कि वह
फैसला एकदम सही था। कोई फायदे के लिए गठबंधन नहीं टूटा था। वह नीतिगत और
सैद्धांतिक फैसला था। नीतीश ने कहा कि जनादेश का सम्मान होना चाहिए।
मतदाताओं ने भाजपा को जनादेश दिया है। आशा है कि चुनाव प्रचार के दौरान किए
गए वादे सरकार पूरा करेगी और हमलोगों को भी अच्छे दिन आने का अनुभव होगा।
नीतीश
ने शाम 5 बजे प्रेस कांफ्रेंस कर अपने इस्तीफे की पुष्टि की। नीतीश ने कहा
कि बिहार में अपनी पार्टी का चुनाव का मैं नेतृत्व कर रहा था। जो नतीजे आए
उसकी जिम्मेदारी मैं लेता हूं। हमने सारी मर्यादाओं का पालन करते हुए
चुनाव लड़ा। नीतीश ने कहा कि पूरा का पूरा चुनावी अभियान में मुद्दों पर
चर्चा कम, नीतियों पर बातें कम, आरोप प्रत्यारोप ज्यादा, व्यक्तिगत
टिप्पणियां ज्यादा रहा। इस तरह का चुनाव प्रचार मैंने अपने राजनीतिक जीवन
में नहीं देखा।
नीतीश
ने कहा कि जो परिणाम आ रहे थे, उस दौरान मीडिया के कई मित्रों ने संपर्क
किया था और ये जानना चाहा था कि मेरी कोई प्रतिक्रिया है या नहीं। मैंने
कहा था कि मैं जनादेश का सम्मान करता हूं और कहा कि कल बातचीत करूंगा।
बिहार के नतीजों में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण साफ नजर आया। बीजीप ने जीत
हासिल की है और मैं जनादेश का सम्मान करता हूं। बीजेपी ने लोगों से जितने
तरह के वादे किए हैं वो पूरे किए जाएं। हमारी शुभकामना है कि लोग अच्छे दिन
महसूस करें। हमारी पूरी शुभकामना है।
बिहार
में जेडीयू के खराब प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके खुद
के नेताओं की नाराजगी बढ़ती जा रही थी। जेडीयू के विधायक ज्ञानेंद्र सिंह
पार्टी की हार के लिए साफ तौर पर नीतीश को जिम्मेदार ठहराया था। ज्ञानेंद्र
सिंह ने कहा कि हार के लिए 7 वरिष्ठ नेता जिम्मेदार हैं।
जेडीयू
विधायक ज्ञानेंद्र के मुताबिक अगर पार्टी अब भी नहीं संभली तो विधानसभा
में भी सफाया हो सकता है। इससे पहले नीतीश के मंत्री रमई राम ने भी हार के
लिए बीजेपी से गठबंधन के टूटने को जिम्मेदार ठहराया था और कहा था कि नीतीश
और शरद यादव की वजह से ही ये गठबंधन टूटा।
24 नवंबर 2005 को मुख्यमंत्री बने थे
नीतीश
कुमार के लिए सबसे शर्मनाक बात यह रही कि लोकसभा चुनाव के साथ ही जिन पांच
विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव कराए गए उनमें से उनकी पार्टी को सिर्फ एक
सीट पर ही कामयाबी मिली जबकि आरजेडी ने तीन और बीजेपी के खाते में एक सीट
गई। चुनाव नतीजों के घोषित होने के बाद से यह अनुमान लगाया जा रहा था कि
बिहार में सरकार का पतन हो जाएगा क्योंकि पार्टी के विधायक पाला बदल सकते
हैं। 24 नवंबर 2005 को मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार 2010 के चुनाव में
दूसरे कार्यकाल के लिए जीते थे।
