राजेश कानोडिया, नवगछिया।
नवगछिया को पुलिस जिला बने हुए 22 साल बीत चुके हैं। इसके बावजूद भी यहा अपराध पर पूरी तरह से अब तक भी काबू नहीं पाया जा सका है। जहां आज हर कोई पूछता है कि आखिर नवगछिया में कैसे होगा अपराध नियंत्रण? वही नवगछिया में अपराध के बेकाबू रहने के कई कारण तब से आज तक विद्यमान हैं।
- 1992 में बने पुलिस जिला के लिए स्वीकृत बल और पदाधिकारी की कमी आज तक जारी है। जबकि 22 वर्षों में बढ़ी आबादी और अपराध के हिसाब से इसमें और इजाफा होना चाहिए था।
- फलस्वरूप किसी भी थाना में पर्याप्त स्वीकृत बल नहीं है।
- यहा मांग के बाद भी नहीं मिल रहे एसटीएफ़ के जवान।
- इस दियारा बहुल पुलिस जिला में नहीं है घुड़सवार दस्ता।
- लगातार हो रही हत्या को रोकने के लिए नहीं है खोजी श्वान दस्ता।
- कई जिला के इस सीमावर्ती क्षेत्र के नवगछिया पुलिस जिला की भोगौलीक बनावट भी है विषम ।
- यहाँ संसाधनों और वाहनों का है घोर अभाव ।
- पुरानी घिसी पिटी व्यवस्था के तहत चल रहा है नवगछिया पुलिस जिला।
- यहाँ अपराधियों का नहीं हो पाता है भौतिक सत्यापन।
- एक भी थाना अब तक नहीं हो सका है कंप्यूटराइज्ड।
- एसडीपीओ कार्यालय का कार्य अब भी होता है टाइपराइटर के ही भरोसे।
- लंबे समय से पुलिस उपाधीक्षक का पद पड़ा है खाली।
- पुलिस कर्मियों के लिए अब तक पुलिस लाइन का नहीं हो सका है निर्माण।
- वीडियो कान्फ्रेंसिंग के लिए अक्सर नवगछिया के पुलिस अधीक्षक को जाना पड़ता है भागलपुर।
