एक अस्पताल जो खुद ही बीमार हो, जहां कोई दवा न हो, सुई और सिरिंज न हो, मुखौटे के तौर पर एक दो डाक्टर की प्रतिनियुक्ति हो | वह भला बीमार लोगों का क्या इलाज कर पाएगा | यह हाल है बिहार के
स्वास्थ्य मंत्री अश्वनी चौबे के इलाके भागलपुर जिले के नवगछिया स्थित अनुमंडलीय अस्पताल का |
जहां हर कोई एक दूसरे से पूछता है कि आखिर कब तक और कैसे होगा इस बीमार अस्पताल का इलाज | जहां खुद स्वास्थ्य मंत्री को लघुशंका करने की जगह तक खोजने पर नहीं मिल सकी थी | बावजूद इसके इलाज की जहमत अब तक नहीं उठ पायी है | आखिर कैसे मिलेगा नवगछिया के लोगों को अच्छे स्वास्थ्य का लाभ |
बहरहाल इस नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल का हाल यह है कि यहाँ जीवन रक्षक आपातकालीन दवा से लेकर ओपीडी की दवा तक तथा सुई से लेकर सिरिंच तक स्लाइन से लेकर ग्लब्स तक यानि कुछ भी नहीं है | जिसकी पुष्टि यहाँ पदस्थापित डाक्टर भी कराते हैं | वहीं अन्य स्वास्थ्य कर्मी बताते हैं कि दवा इत्यादि सामानों की विभाग से मांग की गयी है |
यहाँ अगर है तो सिर्फ सफ़ेद हाथी नुमा भवन, एक अस्पताल उपाधिक्षक, मुखौटे के रूप में असहाय डाक्टर, गिने चुने स्वास्थ्य कर्मी | जिनके भरोसे यहाँ आते हैं अनुमंडल भर के विभिन्न प्रकार के रोगी और दुर्घटना के शिकार लोग |
नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल के हालात यह हैं कि अगर कोई दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति पहुँच जाये तो डाक्टर के द्वारा इलाज करने से पहले पहनने वाला दस्ताना (ग्लब्स) भी नहीं है | जिसके अभाव मेँ डाक्टर कैसे मरीज की हालत जान पाएगा | सोचनीय स्थिति है कि जब डाक्टर रोगी की हालत नहीं जान पाएगा तो दुर्घटना ग्रस्त व्यक्ति की जान कैसे बचा पाएगा | अगर किसी भी प्रकार से इलाज शुरू भी किया जाएगा तो सामान्य इंजेक्सन डेकसोना, एंटीबायोटिक तो दूर टेटभेक तक का यहाँ अभाव है | साथ ही सुई तो दूर सुई देने के लिए सिरिंच भी जल्दबाज़ी में बाजार से ही खरीद कर देना होगा | इसके अलावा कुत्ता या अन्य जानवर के काटने के बाद या साँप काटने के बाद लगाने वाली सुई भी इस अस्पताल में नहीं है | जानकारी तो यह भी है कि नवगछिया में पदस्थापित डाक्टरों की सेवा दूसरी जगहों पर ली जा रही है और उनका वेतन नवगछिया अस्पताल के माध्यम से मिलता है | इसी का नतीजा है इस अस्पताल में दिन प्रति दिन ओपीडी में रोगियों की घटती संख्या |
और तो और इस अस्पताल में भगवान भरोसे महिलाओं को प्रसव भी कराया जाता है | जहां हेमेक्सील जैसी जरूरी दवा का अभाव है | यदि प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्त श्राव होने लगे तो उसकी रोक थाम के लिए भी कोई उपाय नहीं है |
इस अस्पताल में ब्लड बैंक के लिए आए तथा एचडीएफ़सी बैंक द्वारा प्रदान किए गए लाखों के उपकरण भी बेकार साबित हो रहे हैं | जिसका आज तक कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है | जिसके अभाव में लोगों को इधर उधर भटकने के सिवा दूसरा कोई चारा नजर नहीं आता है | स्पष्ट है कि बिहार के स्वास्थ्य मंत्री अश्वनी चौबे के भरोसे नहीं रह सकता है नवगछिया अनुमंडल के लोगों का स्वास्थ्य |
स्वास्थ्य मंत्री अश्वनी चौबे के इलाके भागलपुर जिले के नवगछिया स्थित अनुमंडलीय अस्पताल का |
जहां हर कोई एक दूसरे से पूछता है कि आखिर कब तक और कैसे होगा इस बीमार अस्पताल का इलाज | जहां खुद स्वास्थ्य मंत्री को लघुशंका करने की जगह तक खोजने पर नहीं मिल सकी थी | बावजूद इसके इलाज की जहमत अब तक नहीं उठ पायी है | आखिर कैसे मिलेगा नवगछिया के लोगों को अच्छे स्वास्थ्य का लाभ |
बहरहाल इस नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल का हाल यह है कि यहाँ जीवन रक्षक आपातकालीन दवा से लेकर ओपीडी की दवा तक तथा सुई से लेकर सिरिंच तक स्लाइन से लेकर ग्लब्स तक यानि कुछ भी नहीं है | जिसकी पुष्टि यहाँ पदस्थापित डाक्टर भी कराते हैं | वहीं अन्य स्वास्थ्य कर्मी बताते हैं कि दवा इत्यादि सामानों की विभाग से मांग की गयी है |
यहाँ अगर है तो सिर्फ सफ़ेद हाथी नुमा भवन, एक अस्पताल उपाधिक्षक, मुखौटे के रूप में असहाय डाक्टर, गिने चुने स्वास्थ्य कर्मी | जिनके भरोसे यहाँ आते हैं अनुमंडल भर के विभिन्न प्रकार के रोगी और दुर्घटना के शिकार लोग |
नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल के हालात यह हैं कि अगर कोई दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति पहुँच जाये तो डाक्टर के द्वारा इलाज करने से पहले पहनने वाला दस्ताना (ग्लब्स) भी नहीं है | जिसके अभाव मेँ डाक्टर कैसे मरीज की हालत जान पाएगा | सोचनीय स्थिति है कि जब डाक्टर रोगी की हालत नहीं जान पाएगा तो दुर्घटना ग्रस्त व्यक्ति की जान कैसे बचा पाएगा | अगर किसी भी प्रकार से इलाज शुरू भी किया जाएगा तो सामान्य इंजेक्सन डेकसोना, एंटीबायोटिक तो दूर टेटभेक तक का यहाँ अभाव है | साथ ही सुई तो दूर सुई देने के लिए सिरिंच भी जल्दबाज़ी में बाजार से ही खरीद कर देना होगा | इसके अलावा कुत्ता या अन्य जानवर के काटने के बाद या साँप काटने के बाद लगाने वाली सुई भी इस अस्पताल में नहीं है | जानकारी तो यह भी है कि नवगछिया में पदस्थापित डाक्टरों की सेवा दूसरी जगहों पर ली जा रही है और उनका वेतन नवगछिया अस्पताल के माध्यम से मिलता है | इसी का नतीजा है इस अस्पताल में दिन प्रति दिन ओपीडी में रोगियों की घटती संख्या |
और तो और इस अस्पताल में भगवान भरोसे महिलाओं को प्रसव भी कराया जाता है | जहां हेमेक्सील जैसी जरूरी दवा का अभाव है | यदि प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्त श्राव होने लगे तो उसकी रोक थाम के लिए भी कोई उपाय नहीं है |
इस अस्पताल में ब्लड बैंक के लिए आए तथा एचडीएफ़सी बैंक द्वारा प्रदान किए गए लाखों के उपकरण भी बेकार साबित हो रहे हैं | जिसका आज तक कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है | जिसके अभाव में लोगों को इधर उधर भटकने के सिवा दूसरा कोई चारा नजर नहीं आता है | स्पष्ट है कि बिहार के स्वास्थ्य मंत्री अश्वनी चौबे के भरोसे नहीं रह सकता है नवगछिया अनुमंडल के लोगों का स्वास्थ्य |
