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नाथनगर में मिली भगवान विष्णु की सवारी गरुड़

भगवान विष्णु की सवारी पौराणिक पक्षी गरूड़ (ग्रेटर एड्जूटेंट) के वंशज को सोमवार को नाथनगर के दिलदारपुर में भी देखा गया। गरुड़ को देखते ही पूरे गांव में कौतूहल फैल गया।  खेत में मूर्छित पड़े गरूड़ के बच्चे पर आंख जाते ही अप्पू ने गांव के लोगों को बुला कर दिखाया। गांव के बूढ़े-बुजुर्ग ने देखते ही उजले रंग के पाए गए पक्षी को गरूड़ होने की पुष्टि की।

ग्रामीणों ने बताया कि इसके साथ दो और गरूड़ के बच्चे मिले थे, जिसे मोहल्लेवासी लेकर चले गए। इस बीच अप्पू ने जब पूर्व पार्षद देवाशीष बनर्जी को इस बाबत सूचना दी तो वो मूर्छित पड़े गरूड़ के बच्चे को अपने साथ ले गए और प्राथमिक उपचार के बाद उसे होश में लाया गया। बाद में वन विभाग के अधिकारियों को भी खबर दी गई। वन विभाग के अधिकारी ने तत्काल गरूड़ के घोंसले तलाशने की हिदायत देते कहा कि ये बच्चा बहुत छोटा है और बिना मां की चोंच से इसे भोजन नहीं दिया जा सकता।
गौरतलब है कि गरूड़ देशभर में विलुप्ति के कगार पर हैं। वैसे राहत की बात है कि उत्तर बिहार के गंगा-कोसी के आसपास गरूड़ों ने अपना वंश बढ़ाने का स्थान खोज लिया है और इसका प्रमाण है नाथनगर में गरूड़ के तीन बच्चों का मिलना। इस क्षेत्र में गरूड़ों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक पूर्व में गरूड़ दक्षिण कम्बोडिया और असम की ब्रह्मापुत्र घाटी के आसपास अपना बसेरा बनाते थे और वहीं प्रजनन करते थे। लेकिन वैज्ञानिकों को तब हैरानी हुई जब वर्ष 2006 में भागलपुर के पास गंगा दियारा क्षेत्र में गरूड़ के घोंसले पाए गए। इसके बाद वैज्ञानिकों के लिए यह स्थान शोध का विषय बन गया। गरूड़ पिछले दो दशक से इस क्षेत्र में प्रजनन के लिए आते हैं। यह अलग बात है कि लोगों की नजर 2006 में इस पर गई।
2006-07 में सुल्तानगंज प्रखंड के गंगा दियारा क्षेत्र के अंतर्गत मनोहरपुर एवं माधोपुर गाव तथा नवगछिया प्रखंड के कोसी दियारा क्षेत्र के कदबा व खैरपुर गाव में गरूड़ के घोंसले पाए गए थे और वहा भी गरूड़ों के होने का अनुमान लगाया गया था।
इस पक्षी को वन्य प्राणी संरक्षण एक्ट 1972 के अंतर्गत विलुप्तप्राय माना गया है जबकि इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर ने इसे लाल सूची (रेड लिस्ट) में रखा है।