सरकार को सोमवार को 2जी
स्पेक्ट्रम की नीलामी के पहले दिन 9200 करोड़ रुपए की बोलियां प्राप्त
हुईं। ऊंचे आधार मूल्य की वजह से दूरसंचार कंपनियों ने स्पेक्ट्रम नीलामी
में अभी ज्यादा रुचि नहीं दिखाई।
अखिल भारतीय स्पेक्ट्रम के लिए एक भी बोली नहीं मिली। सरकार ने अखिल भारतीय स्पेक्ट्रम के लिए शुरुआती मूल्य 14000 करोड़ रुपए रखा है। मुख्य रूप से मांग कुछ चुनिंदा सर्किलों मसलन गुजरात, उत्तरप्रदेश (पूर्व) तथा उत्तरप्रदेश (पश्चिम) पर केंद्रित रही।
कुल 22 दूरसंचार सर्किलों में से बोलियां सिर्फ 18 सर्किलों के लिए
मिलीं। दिल्ली, मुंबई, राजस्थान और कर्नाटक सर्किलों के लिए पहले दिन एक भी बोली प्राप्त नहीं हुई। दूरसंचार सचिव आर चंद्रशेखर ने कहा, पांचवें दौर के अंत तक कुल मिलाकर 9200 करोड़ रुपए से कुछ अधिक बोलियां मिली थीं।
उच्चतम न्यायालय ने फरवरी 2008 में जारी 122 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस रद्द किए थे। सरकार खाली हुए स्पेक्ट्रम की नीलामी से कम से कम 28000 करोड़ रुपए का राजस्व मिलने की उम्मीद कर रही है। पहले दिन की नीलामी से साफ पता चलता है कि दूरसंचार कंपनियां इसमें रुचि नहीं दिखा रही हैं।
सरकार ने सभी 22 दूरसंचार सर्किलों के 5 मेगाहर्टज स्पेक्ट्रम के लिए न्यूनतम बोली मूल्य 14000 करोड़ रुपए रखा है। यह 2008 में आपरेटरों द्वारा अदा किए गए आधार मूल्य का सात गुना है।
दूरसंचार सचिव चंद्रशेखर ने कहा कि नीलामी के लिए पेश स्पेक्ट्रम के कुल 176 ब्लाकोंमें से सरकार को सिर्फ 98 के लिए बोलियां मिली हैं। सभी 22 सर्किलों में से उत्तरप्रदेश (पश्चिम) और उत्तरप्रदेश (पूर्व) में स्पेक्ट्रम की मांग पेशकश से अधिक रही है।
चंद्रशेखर ने कहा कि उत्तरप्रदेश (पश्चिम) और उत्तरप्रदेश (पूर्व) में स्पेक्ट्रम मांग आरक्षित मूल्य से आगे निकल गई। गुजरात और बिहार के सभी आठ ब्लॉकों में (1.25 मेगाहर्टज प्रत्येक) के लिए बोलियां प्राप्त हुईं। शेष सर्किलों में मांग 8 ब्लॉकों से कम की रही।
सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के महासचिव आरएस मैथ्यूज ने कहा कि हमने कहा था कि ऊंचे आरक्षित मूल्य की वजह से कम कंपनियां ही इसमें शामिल होंगी और यही हो रहा है।
उन्होंने कहा कि सीओएआई ने सही अनुमान लगाया था कि कई सर्किलों में एक भी बोली नहीं मिलेगी। मैथ्यूज ने कहा कि नीलामी दो दिन से ज्यादा नहीं चलेगी।
असम में 7 ब्लॉकों, हरियाणा, मध्यप्रदेश, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, पश्चिम बंगाल तथा पूर्वोत्तर के लिए 6-6 ब्लॉकों और महाराष्ट्र क्षेत्र के लिए 5 बोलियां प्राप्त हुई हैं। वहीं हिमाचल प्रदेश, कोलकाता और तमिलनाडु को 8 ब्लॉकों की पेशकश पर सिर्फ 4 ब्लॉकों के लिए बोलियां मिली हैं।
हिमाचल प्रदेश, केरल और पंजाब को सिर्फ एक-एक ब्लॉके के लिए बोलियां मिलीं। इससे यह संकेत मिलता है कि टेलीनार प्रवर्तित टेलीविंग्स और वीडियोकॉन ने इन सर्किलों में बोलियां नहीं लगाई हैं। इन कंपनियों के लाइसेंस उच्चतम न्यायालय के आदेश से रद्द हुए हैं।
प्रमुख दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने पिछले सप्ताह कहा था कि ऊंचे आधार मूल्य की वजह से नीलामी पहले दिन ही पूरी हो जाएगी।
भारती एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया सेल्यूलर, वीडियोकॉन और नॉर्वे की टेलीनार जीएसएम स्पेक्ट्रम के लिए दौड़ में हैं, जबकि सीडीएमए स्पेक्ट्रम के लिए टाटा टेलीसर्विसेस और वीडियोकॉन के हटने के बाद कोई कंपनी दौड़ में नहीं रह गई।
अखिल भारतीय स्पेक्ट्रम के लिए एक भी बोली नहीं मिली। सरकार ने अखिल भारतीय स्पेक्ट्रम के लिए शुरुआती मूल्य 14000 करोड़ रुपए रखा है। मुख्य रूप से मांग कुछ चुनिंदा सर्किलों मसलन गुजरात, उत्तरप्रदेश (पूर्व) तथा उत्तरप्रदेश (पश्चिम) पर केंद्रित रही।
कुल 22 दूरसंचार सर्किलों में से बोलियां सिर्फ 18 सर्किलों के लिए
मिलीं। दिल्ली, मुंबई, राजस्थान और कर्नाटक सर्किलों के लिए पहले दिन एक भी बोली प्राप्त नहीं हुई। दूरसंचार सचिव आर चंद्रशेखर ने कहा, पांचवें दौर के अंत तक कुल मिलाकर 9200 करोड़ रुपए से कुछ अधिक बोलियां मिली थीं।
उच्चतम न्यायालय ने फरवरी 2008 में जारी 122 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस रद्द किए थे। सरकार खाली हुए स्पेक्ट्रम की नीलामी से कम से कम 28000 करोड़ रुपए का राजस्व मिलने की उम्मीद कर रही है। पहले दिन की नीलामी से साफ पता चलता है कि दूरसंचार कंपनियां इसमें रुचि नहीं दिखा रही हैं।
सरकार ने सभी 22 दूरसंचार सर्किलों के 5 मेगाहर्टज स्पेक्ट्रम के लिए न्यूनतम बोली मूल्य 14000 करोड़ रुपए रखा है। यह 2008 में आपरेटरों द्वारा अदा किए गए आधार मूल्य का सात गुना है।
दूरसंचार सचिव चंद्रशेखर ने कहा कि नीलामी के लिए पेश स्पेक्ट्रम के कुल 176 ब्लाकोंमें से सरकार को सिर्फ 98 के लिए बोलियां मिली हैं। सभी 22 सर्किलों में से उत्तरप्रदेश (पश्चिम) और उत्तरप्रदेश (पूर्व) में स्पेक्ट्रम की मांग पेशकश से अधिक रही है।
चंद्रशेखर ने कहा कि उत्तरप्रदेश (पश्चिम) और उत्तरप्रदेश (पूर्व) में स्पेक्ट्रम मांग आरक्षित मूल्य से आगे निकल गई। गुजरात और बिहार के सभी आठ ब्लॉकों में (1.25 मेगाहर्टज प्रत्येक) के लिए बोलियां प्राप्त हुईं। शेष सर्किलों में मांग 8 ब्लॉकों से कम की रही।
सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के महासचिव आरएस मैथ्यूज ने कहा कि हमने कहा था कि ऊंचे आरक्षित मूल्य की वजह से कम कंपनियां ही इसमें शामिल होंगी और यही हो रहा है।
उन्होंने कहा कि सीओएआई ने सही अनुमान लगाया था कि कई सर्किलों में एक भी बोली नहीं मिलेगी। मैथ्यूज ने कहा कि नीलामी दो दिन से ज्यादा नहीं चलेगी।
असम में 7 ब्लॉकों, हरियाणा, मध्यप्रदेश, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, पश्चिम बंगाल तथा पूर्वोत्तर के लिए 6-6 ब्लॉकों और महाराष्ट्र क्षेत्र के लिए 5 बोलियां प्राप्त हुई हैं। वहीं हिमाचल प्रदेश, कोलकाता और तमिलनाडु को 8 ब्लॉकों की पेशकश पर सिर्फ 4 ब्लॉकों के लिए बोलियां मिली हैं।
हिमाचल प्रदेश, केरल और पंजाब को सिर्फ एक-एक ब्लॉके के लिए बोलियां मिलीं। इससे यह संकेत मिलता है कि टेलीनार प्रवर्तित टेलीविंग्स और वीडियोकॉन ने इन सर्किलों में बोलियां नहीं लगाई हैं। इन कंपनियों के लाइसेंस उच्चतम न्यायालय के आदेश से रद्द हुए हैं।
प्रमुख दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने पिछले सप्ताह कहा था कि ऊंचे आधार मूल्य की वजह से नीलामी पहले दिन ही पूरी हो जाएगी।
भारती एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया सेल्यूलर, वीडियोकॉन और नॉर्वे की टेलीनार जीएसएम स्पेक्ट्रम के लिए दौड़ में हैं, जबकि सीडीएमए स्पेक्ट्रम के लिए टाटा टेलीसर्विसेस और वीडियोकॉन के हटने के बाद कोई कंपनी दौड़ में नहीं रह गई।