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त्यौहार की खुशियां मना कर सजा काटने फिर चला जाऊंगा चडीगढ़ जेल- शलाहुद्दीन

हत्या के जुर्म में बारह वर्षों से चंडीगढ़ जेल की सीखचों में बन्द एक युवक रविवार की देर रात अपने परिवार से मिलने नवगछिया पहुंचा है। जो नवगछिया पुलिस जिला अन्तर्गत रंगरा चौक थाना क्षेत्र के जहांगीरपुर बैसी निवासी स्व० निजामुद्दीन का बेटा मो० शलाहुद्दीन है। जिसके पहुंचते ही घर में खुशी का महौल छा गया। जहां शलाहुद्दीन को उसके बुढे पिता तो नहीं मिले, पर बूढ़ी और बीमार मां, दादा का सगा भाई सगीद, चाचा रियाजुल, भैया इम्तियाज उर्फ़ जैला, छोटा भाई मुख्तार और छोटी बहन के आंखों से खुशी के आंसू रुक नहीं रहे थे। इस खुशी के माहौल में शलाहुद्दीन को खल रही थी तो सिर्फ अपने अब्बा की कमी। जिनका देहांत लगभग डेढ़ साल पहले हो चुका था।

वहीं दूसरी तरफ शलाहुद्दीन की आंखों के सामने तैर रहा था चंडीगढ़ के जेल के अन्दर का दर्द। जिसे वह एक हत्या के जुर्म में झेल रहा है।
शलाहुद्दीन बताता है कि यह सजा उसे चंडीगढ के सेक्टर १० निवासी एक कर्नल की पत्नी की हत्या के जुर्म में मिली है। जिसमें उसका नौकर घायल हो गया था। इस घटना में शामिल तीन में से दो लोग ही पकडे गये थे। इस मामले के तहत १९ फरवरी २००१ से जेल में हैं। जबकि २००६ में आजीवन कारावास की सजा हो गयी। कई प्रमुख सामाजिक लोगों की तरफ़दारी के बाद मुझे १० अक्तुबर को २८ दिनों की मोहलत परिवार के लोगों से मिलने की मिली है। इस बीच बकरीद का त्यौहार भी घरवालों के संग मनाने का मौका मिलेगा। फिर मुझे ८ नवंबर से पहले तक उसी जेल में वापस पहुंचना है।
शलाहुद्दीन और उसके परिजन इस बात के कायल हैं कि चंडीगढ़ के कांग्रेस कमिटी के जिला उपाध्यक्ष अब्दुल रहमान एवं मुर्तजा आलम जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं की सिफ़ारिस की बदौलत आजीवन कारावास की सजा काट रहे सजायाफ़्ता कैदी को २८ दिनों के लिये बीमार मां और परिजनों से मिलने का मौका मिला। जो २००१ से ही चंडीगढ़ जेल में बंद था।