दुर्गा पूजा यानि नवरात्र अभी एक सप्ताह दूर है। मगर गांव और शहर में इसकी तैयारियां जोर पकड़ने लगी है।
पंडालों से लेकर घरों तक पूजा कराने के लिए पंडित जी की एडवांस बुकिंग अभी से शुरु
हो चुकी है। कारण इलाके में पंडितों का टोटा जो ठहरा।
इधर राशन-पानी व गैस की कीमतों में महंगाई के साइड इफेक्ट का भी असर है कि पंडित जी ने भी
पूजा के लिए इस बार दक्षिणा के रेट बढ़ा दिए हैं। वैसे भी शहर की आपाधापी और भौतिकवादी जमाने में पंडित जी को ढूंढ़ना अब टेढ़ी खीर हो गई है। पंडित जी के बढ़े रेट से यजमानों की परेशानी बढ़ गई है।
पूजा-पाठ के इस पेशे से पंडितों की कमाई कम होने के कारण भी मोह भंग होने लगा। जिससे पंडित जी अब ढूंढ़े नहीं मिल रहे हैं। एक तो जिस तरह तकनीकी और प्रौद्योगिकी की दखल और उपर से समय की कमी। लोग पूजा पाठ भी फटाफट कर निवृत होना चाहते हैं। अब तो धार्मिक आयोजन या फिर लग्न के मौके पर ही पंडितों की खोज होती है।
शहर के प्राय हर घर में दुर्गा पूजा काफी नियम-निष्ठा से मनाया जाता है। बढ़ती महंगाई के बावजूद लोग पूजा में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते। बड़े से लेकर मध्यमवर्गीय परिवार भी दुर्गा पूजा को काफी उत्साह से मनाते हैं। भागलपुर जैसे शहर में कई यजमान काशी विश्वनाथ से भी पूजा के लिए पंडित को बुला रहे हैं। मिथिलांचल और ग्रामीण इलाकों से भी पंडितों का आना-जाना शुरु हो गया है। पूजा में पंडित जी को ढूंढ़ने में परेशानी न हो, पहले से ही एडवांस बुकिंग करने लगे हैं।
इधर राशन-पानी व गैस की कीमतों में महंगाई के साइड इफेक्ट का भी असर है कि पंडित जी ने भी
पूजा के लिए इस बार दक्षिणा के रेट बढ़ा दिए हैं। वैसे भी शहर की आपाधापी और भौतिकवादी जमाने में पंडित जी को ढूंढ़ना अब टेढ़ी खीर हो गई है। पंडित जी के बढ़े रेट से यजमानों की परेशानी बढ़ गई है।
पूजा-पाठ के इस पेशे से पंडितों की कमाई कम होने के कारण भी मोह भंग होने लगा। जिससे पंडित जी अब ढूंढ़े नहीं मिल रहे हैं। एक तो जिस तरह तकनीकी और प्रौद्योगिकी की दखल और उपर से समय की कमी। लोग पूजा पाठ भी फटाफट कर निवृत होना चाहते हैं। अब तो धार्मिक आयोजन या फिर लग्न के मौके पर ही पंडितों की खोज होती है।
शहर के प्राय हर घर में दुर्गा पूजा काफी नियम-निष्ठा से मनाया जाता है। बढ़ती महंगाई के बावजूद लोग पूजा में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते। बड़े से लेकर मध्यमवर्गीय परिवार भी दुर्गा पूजा को काफी उत्साह से मनाते हैं। भागलपुर जैसे शहर में कई यजमान काशी विश्वनाथ से भी पूजा के लिए पंडित को बुला रहे हैं। मिथिलांचल और ग्रामीण इलाकों से भी पंडितों का आना-जाना शुरु हो गया है। पूजा में पंडित जी को ढूंढ़ने में परेशानी न हो, पहले से ही एडवांस बुकिंग करने लगे हैं।