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बिहार के रास्ते विदेश भेजने के रैकेट का खुलासा

बिहार के रास्ते लोगों को कनाडा भेजनेवाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एसटीएफ ने छह बदमाशों को गिरफ्तार किया है.
उनके चंगुल से सूरत के रहनेवाले धनंजय पटेल नामक युवक को मुक्त कराया गया. देश के कई राज्यों में सक्रिय इस गिरोह को पटना में उस वक्त दबोचा गया जब वे युवक को सड़क मार्ग के जरिए नेपाल ले जाने की फिराक में थे. शातिरों से भारतीय मुद्रा, डॉलर, नींद की गोलियां और दूसरे कई सामान बरामद हुए हैं. गिरफ्त में आए अभियुक्तों को सोमवार को मध्यप्रदेश
एटीएस अपने साथ ले गई.
एसटीएफ के मुताबिक उन्हें मध्यप्रदेश एसटीएस से सूचना मिली थी कि सम्पन्न घरों के युवकों को अवैध तरीके से विदेश भेजने के लिए एक देशव्यापी गिरोह सक्रिय है. बिहार में भी उसका नेटवर्क काम कर रहा है. पंजाब, दिल्ली, मध्यप्रदेश और गुजरात समेत कई राज्यों से इस गिरोह ने कनाडा भेजने के नाम पर दर्जनों लोगों से मोटी रकम ऐंठी हैं. सूचना के बाद एसटीएफ कबूतरबाजों के इस गिरोह की तलाश में जुट गई. गुप्त सूचना पर गिरोह के 6 सदस्यों को पटना से गिरफ्तार किया गया.
एसटीएफ ने उनके चंगुल से धनंजय पटेल नाम के युवक को मुक्त कराया जो कि गुजरात के सूरत का रहने वाला है. पकड़े गए अभियुक्तों में दो नेपाल, दो कोलकाता और एक मधुबनी का है. मामला बेहद संगीन होने की वजह से जांच एजेंसियां गोपनीय तरीके से काम कर रही हैं. एसटीएफ के मुताबिक यह गिरोह सम्पन्न घरों के युवकों को झांसे में लेता है. कनाडा भेजने और वहां नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से मोटी रकम ली जाती थी.
हालांकि यह रकम वास्तव में आनेवाली खर्च से कम होती है जिसके चलते लोग उनके झांसे में आ जाते थे. पासपोर्ट बनाने से लेकर विदेश जाने के लिए अन्य जरूरी कागजात तैयार कर पहले लोगों का विास हासिल किया जाता था. घरेलू हवाई अड्डे पर बुलाने के बाद गिरोह के सदस्य यह कहकर लोगों को कोलकाता ले जाते कि फ्लाइट का टिकट वहीं से है.
इसके बाद तकनीकी कारण बताकर उन्हें वाया पटना होते हुए दिल्ली चलने को कहा जाता. पटना पहुंचने के बाद वे लोगों को अपने चंगुल में ले लेते और उन्हें सड़क मार्ग से नेपाल पहुंचाते थे. सूरत के रहनेवाले धनंजय पटेल के साथ भी ऐसा ही किया गया था. कनाडा भेजने के लिए उसके परिजनों से 17 लाख रुपए लिये गए थे. हालांकि धनंजय खुशकिस्मत रहा कि उसे पटना में एसटीएफ की टीम ने बरामद कर लिया गया.
एसटीएफ के मुताबिक कबूतरबाज लोगों को नेपाल से कहां और कैसे ले जाते थे इसका खुलासा फिलहाल नहीं हो पाया है. गिरोह का सरगना नेपाल के जनकपुर में रहता है और चंगुल में आए लोगों को वहीं ले जाया जाता था.
धनंजय पटेल से पहले इस गिरोह ने अन्य राज्यों के अलावा मध्यप्रदेश के कई लोगों से भी विदेश भेजने के लिए मोटी रकम ऐंठी थी. जिसके चलते मध्यप्रदेश एटीएस इस गिरोह के पीछे लगी थी. मध्यप्रदेश में मामला दर्ज होने के चलते गिरफ्तार अभियुक्तों को ट्रांजिट रिमांड पर उनके हवाले कर दिया गया है. अन्य राज्यों की पुलिस को भी इस संबंध में जानकारी दी गई है. पूरे अभियान को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया.