मोबाइल टावरों के इलेक्ट्रॉनिक तरंगीय ऊर्जा का असर मुंगेर जिला के जमालपुर शहर और इसके आसपास के क्षेत्रों में परिलक्षित होने लगा है। इसका बुरा असर मानव, पशु, पक्षी और लंबे फलदार वृक्षों पर होने के साथ ही इससे जुड़ी कंपनियां सरकार को प्रति वर्ष लाखों के राजस्व का चूना भी लगाया जा रहा है। नप प्रशासन इस पर गंभीर हो गया है। टावर कंपनियों को नोटिश भेजने की प्रक्रिया में है।
ज्ञात हो कि मोबाइल कंपनियां नियम कानून को ताख पर रख कर भी टावरों का निर्माण किया है। जिससे आम जनजीवन प्रभावित हैं। शहर के घनी आबादी के बीच कई घरों के छतों पर मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं। इससे अकारण लोगों के माथे पर मौत की तलवार लटक रही है। शिक्षाविदें व पर्यावरणविदें का मानना है कि इन मोबाइल टावरों से निकलने वाली तरंगित ऊर्जा से लंबे फलदार पौधे, मसलन खजूर, ताड़, नारियल के पौधों में वायुपन का लक्षण तेजी से पनपा है। वहीं इसके बुरे असर से कौए और गोरैया नामक पक्षी की प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर है। इस संबंध में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मुकेश कुमार अग्रवाल से पूछे जाने पर बताया कि नप क्षेत्र में लगभग पचास से अधिक टावर लगे हैं। आमजनों को इससे नुकसान की शिकायतें मिली है। इसको ध्यान में रखते हुए टावर मालिकों को नोटिस किया जा रहा है । साथ ही इसे सील करने के लिए जिला प्रशासन से पुलिस बल की मांग की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे टावरों के निबंधन और टैक्स वसूली के लिए नियमावली पर काम किया जा रहा है।