
समाजवाद के संस्थापक कार्ल मार्क्स नहीं मर्यादा पुरुषोत्तम राम थे। जिन्होंने अपने सभी धर्मों का सही तरीके से निर्वाहन किया। जो सभी के लिए एक आदर्श है। ये बातें बाबा रामदास ब्रह्मचारी जी ने रविवार को घाट ठाकुर वाड़ी में प्रवचन के अंतिम दिन कही । जो झांसी जिला के बुन्देल खंड से आये थे। जिन्होंने मुख्य रूप से ब्रह्म और जीव के बारे में विस्तृत व्याख्या की। इस दौरान उन्होंने बताया कि आदि ब्रह्म के रूप में राम अवतरित हुये थे। वहीँ लक्षमण जी जीव धर्म का प्रतिपादन कर रहे थे। जीव में हर्ष, विषाद, ज्ञान, अज्ञान, अहम् एवं अभिमान ये छः प्रकार के विकार पाए जाते हैं। जबकि ब्रह्म में इन विकारों की कोई जगह नहीं है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के समय में कोई दरिद्र नहीं था। न हीं कोई दुखी, दीन , बुद्धि हीन या लक्षण हीन था। यही शुद्ध और विशुद्ध समाज वाद है।