आज करवा चौथ का व्रत है। ऐसा पर्व जिसमें शादी-शुदा महिलाएं पूरे दिन निर्जल व्रत रखकर पति की लंबी आयु और मंगल के लिए कामना करती हैं। ऐसे में भला पति कहां पीछे रहने वाले हैं। अपनी प्यारी पत्नी को देने के लिए उन्होंने भी खास उपहारों का इंतजाम कर रखा है। ये उपहार वो पत्नी को पानी पिलाने के साथ ही भेंट करेंगे।
समय के साथ करवाचौथ के व्रत के स्वरूप में भी बदलाव आया है। नई पीढ़ी करवाचौथ की परंपरा को पूरे उल्लास के साथ मनाती है। करवा चौथ का पहला व्रत रखने वाली महिलाएं ही नहीं बल्कि सालों से यह व्रत रखने वाली महिलाएं भी इसे उतने ही उत्साह से मनाती हैं।
समय-मंगलवार को प्रात: 9.30 बजे के बाद चतुर्थी लगेगी। इसलिए इसी दिन व्रत पूजन होगा। जिस रात को चतुर्थी होती है, वही दिन मान्य होता है। यहां उदयातिथि का नियम लागू नहीं है। मंगलवार को चंद्रमा रात 8.15 बजे करीब उदय होगा। उसके बाद अर्ध्य दिया जायेगा।
पूजन विधि-कार्तिक कृष्ण पक्ष में चंद्रोदय व्यापनी चतुर्थी को शिव, पार्वती, और स्वामी कार्तिक का पूजन किया जायेगा। महिलाएं प्रात: से ही निर्जल व्रत रखेंगी। चंद्रमा, शिव, गौरा-पार्वती और कार्तिक स्वामी की मिंट्टी की मूर्ति बनायी जायेगी। मिट्टी या तांबे के करवों में जल भरकर चंद्रमा को अर्ध्य दिया जायेगा।