नवगछिया अनुमंडल के तेतरी गांव में माता दुर्गा की पूजा सैकड़ों वर्षो से होती आ रही है। गांव के बूढ़े-बुजुर्ग भी नहीं बता पा रहें हैं कि माता दुर्गा की पूजा यहां कब से शुरू हुई है। हां, इतना जरूर बता रहे हैं कि माता ने स्वप्न देकर यहां पूजा करने का आदेश दिया था।

तेतरी की माता दुर्गा की ख्याति चारों दिशाओं में दूर-दूर तक फैली है। यहां वैदिक रीति-रिवाज से पूजा हर साल की जाती है। तेतरी दुर्गा मंदिर के पुराने जीर्ण-शीर्ण भवन का जीर्णोद्धार 2005 में किया गया। जिसका निर्माण कार्य अब तक जारी है। लेकिन नौ महल वाले इस नये भवन में माता की प्रतिमा स्थापित कर पूरे विधान से सारे गांव वासी पूजा अर्चना करते हैं। जिनमें महिलाओं की संख्या सर्वाधिक होती है। नवरात्र के मौके पर इस मंदिर के प्रांगण में कथा-प्रवचन का आयोजन होता है। इस वर्ष भी अखिलेश्र्वरी देवी, भरत दास, राम लखन दास, सदानन्द सरस्वती इत्यादि महान धर्मात्माओं का ज्ञान स्वरूप प्रवचन गुरुवार तक चला। इसके अलावे नवाह यज्ञ के तहत मानस पाठ भी जारी है। जो महंत विजय कुमार द्वारा किया जा रहा हैं। इस आयोजन में कार्यकर्ता जवाहर राय तथा श्याम किशोर सिंह की मुख्य भागीदारी है। दुर्गा पूजा के मौके पर तेतरी में विशाल मेला का भी आयोजन वर्षो से लगातार हो रहा है। जहां लकड़ी एवं लोहे के समानों के साथ-साथ मिठाईयां एवं अन्य खाने की सामग्री नवरात्र समाप्ति के बाद भी पंद्रह दिनों तक मिलता है। ग्रामीण मेले का इंतजार करते रहते हैं। जहां बच्चों के लिए कई प्रकार के झूले तथा महिलाओं के लिए मिनी मार्केट की भी व्यवस्था सुरक्षित ढंग से की जाती है।