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देवता भी करते हैं गुरु की पूजा, श्रीराम से लेकर श्रीकृष्ण तक ने गुरु को दिया सर्वोच्च स्थान : स्वामी आगमानंद जी महाराज

देवता भी करते हैं गुरु की पूजा, श्रीराम से लेकर श्रीकृष्ण तक ने गुरु को दिया सर्वोच्च स्थान : स्वामी आगमानंद जी महाराज
राजेश कानोड़िया, नवगछिया/सहरसा। भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण जैसे अवतारी पुरुषों द्वारा भी गुरु को सर्वोच्च सम्मान दिया जाना इस बात का प्रमाण है कि जीवन में गुरु का स्थान कितना महत्वपूर्ण है। एमएलटी कॉलेज सहरसा के खेल मैदान में आयोजित श्री व्यास गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान जगतगुरु श्री रामचंद्राचार्य परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन देते हुए गुरु की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए यह बताया। 
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि गुरु का स्थान संसार में सर्वोच्च है। देवता भी गुरु की पूजा और सम्मान करते हैं। गुरु ही व्यक्ति को अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले जाने का मार्ग दिखाते हैं। सनातन परंपरा में गुरु की महिमा सदियों से रही है। त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने महर्षि वशिष्ठ एवं महर्षि विश्वामित्र को अपना गुरु माना और उनसे शिक्षा एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया। वहीं द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने भी महर्षि सांदीपनि मुनि के आश्रम में जाकर शिक्षा ग्रहण की। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण ने वहां 64 दिनों में 64 कलाओं और 16 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त किया।
स्वामी आगमानंद जी महाराज ने यह भी कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि शिष्य को सही मार्ग पर चलने और संस्कारवान बनने तथा जीवन के उद्देश्य को समझने की प्रेरणा भी देते हैं। आगमानंद जी महाराज के आशीर्वचन सुनकर महोत्सव में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। उन्होंने श्रद्धालुओं से गुरु के बताए मार्ग पर चलने और अपने जीवन में सदाचार, सेवा, संस्कार एवं समर्पण को अपनाने का आह्वान किया।
देशभर से पहुंचे श्रद्धालु
सहरसा में आयोजित श्री व्यास गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति के साथ 56 भोग लगाया गया। महोत्सव में देश के कोने-कोने से परमहंस स्वामी आगमन जी महाराज के अनुयायी पहुंचे। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरुजी का आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रसाद ग्रहण किया।
प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी परमहंस स्वामी आगमन जी महाराज के अनुयायी बेंगलुरु से पहुंचे। बेंगलुरु से विशेष रूप से फूलों की पंखुड़ियों से सुसज्जित माला लेकर पहुंचे अनुयायियों ने उसे गुरुजी के चरणों में समर्पित किया। इस दौरान ‘जय गुरुदेव’ के जयघोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। महोत्सव में बेंगलुरु के अलावा विशाखापट्टनम, मुंबई, दिल्ली, रांची, लखनऊ, दिल्ली, वाराणसी, उत्तराखंड, झारखंड,  तमिलनाडु सहित देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और गुरुजी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

गुरु भक्ति में डूबा सहरसा, उमड़ा आस्था का सैलाब
श्री शिव शक्ति योग पीठ के तत्वावधान एवं परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज के सानिध्य में श्री व्यास गुरु पूर्णिमा महोत्सव को लेकर सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। देखते ही देखते एमएलटी कॉलेज का खेल मैदान गुरु भक्ति में सराबोर हो गया। दूर-दराज से पहुंचे भक्तों में अपने गुरुदेव के दर्शन और आशीर्वाद को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। सुबह से ही श्रद्धालु गुरु दर्शन एवं पूजन के लिए कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। पूरे परिसर में भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। ‘गुरुदेव’ के जयघोष और भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। महोत्सव के प्रथम चरण में परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज मंच पर पधारे। इसके बाद उपस्थित पंडितों के द्वारा विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के बीच व्यास पूजन एवं गुरु पूजन कराया गया। पूजन कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की और सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। गुरु पूजन के बाद श्रद्धालुओं को गुरु दर्शन एवं आशीर्वाद का अवसर मिला। जैसे ही स्वामी आगमानंद जी महाराज के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी, पूरा परिसर आस्था के सैलाब में तब्दील हो गया। महिला, पुरुष और युवा श्रद्धालु अनुशासित कतार में खड़े होकर अपने गुरुदेव की एक झलक पाने को आतुर दिखे।महोत्सव के दौरान बनारस से आए कलाकारों की ओर से भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। महाआरती के दौरान दीपों की रोशनी और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। श्रद्धालुओं ने महाआरती में शामिल होकर गुरु एवं ईश्वर के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। पूरे दिन एमएलटी कॉलेज परिसर में मानो भक्ति की सरिता बहती रही।