नवगछिया। दस वर्ष तक की कन्याएं साक्षात माता का स्वरूप मानी जाती हैं। इसलिए इनके पूजन का विशेष महत्व है। छोटी कन्याओं का पूजन इसलिए नहीं करना चाहिए क्योंकि वह प्रसाद नहीं खा सकतीं और उन्हें प्रसाद आदि के स्वाद का ज्ञान नहीं होता। इसलिए शास्त्रों में दो से दस वर्ष की आयु की कन्याओं का पूजन करना ही श्रेष्ठ माना गया है। यही कारण है कि इसी उम्र की कन्याओं के पैरों का विधिवत पूजन कर उन्हें भोजन कराया जाता है। ऐसी मान्यता है कि होम, जप और दान से देवी इतनी प्रसन्न नहीं होती जितनी कन्या पूजन से होती हैं।
श्री शिव शक्ति योगपीठ नवगछिया के पीठाधीश्वर परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज ने बताया कि शारदीय नवरात्र में कुंवारी कन्या पूजन का विशेष महत्व है। शास्त्रों के मुताबिक नौ कन्याओं को भोजन कराना चाहिए। अगर नौ से अधिक कन्याएं आपके घर आएं तो इसे अपना सौभाग्य समझें। जो जातक नौ कन्याओं को भोजन करवाने में असमर्थ हो वे कम से कम दो कन्याओं को अवश्य भोजन कराएं।