भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल में कोसी की तबाही को कौन नहीं जानता। चाहे सहोड़ा गाँव की त्रासदी हो या फिर मिल्की अथवा पुनामा प्रतापनगर की। ये तीनों नाम उस गाँव के हैं जो वर्ष 1987 में आयी कोसी की बाढ़ से नस्त नाबूद हैं । इन तीनों गाँव के लोगों ने यत्र तत्र शरण ले कर अपनी जान बचाई थी। इस समय कोसी की बदलती धारा का रुख सकुचा और जहांगीरपुर बैसी गाँव की तरफ साफ नजर आ रहा है। जिस पर कभी भी भयंकर खतरा पैदा हो सकता है।
इस समय सकुचा और जहांगीरपुर बैसी गाँव के ग्रामीण काफी भयभीत हो रहे हैं। जहां लूप बनाते हुए कोसी दोनों गाँव की ओर बढ़ती जा रही है। बहरहाल प्रतिदिन खेतों को काटते हुए कोसी दोनों गाँव के काफी करीब आ चुकी है। सकुचा में तो सुरक्षात्मक बांध की दूरी महज पचास मीटर ही बची है। ग्रामीणों द्वारा इसकी सूचना लगातार विभाग को दिये जाने की बात बताई जा रही है। मामले की जांच करने जब 30 जुलाई को बाढ़ नियंत्रण विभाग ने अपने सहायक अभियंता राम स्वरूप रजक और कनीय अभियंता शशि कुमार ने दोनों स्थलों का निरीक्षण किया। तब माना कि कोसी की धारा का रुख तेजी से इन दोनों गाँव की तरफ हो रहा है। जहां से गाँव की दूरी भी काफी कम ही रह गयी है। इस दौरान सकुचा के ग्रामीणों ने तो इन्हें घेर कर गाँव बचाने की जोरदार गुहार लगायी। वहीं बैसी में अल्प संख्यक प्रकोष्ठ के रंगरा प्रखण्ड अध्यक्ष मो0 मोइजुद्दीन, मो0 गफ्फार सहित कई लोगों ने बताया कि यहाँ का कब्रिस्तान तो इस समय खतरे में आ चुका है। गाँव को भी बचाना बहुत जरूरी है।
जानकारी के अनुसार सहायक अभियंता राम स्वरूप रजक के अनुसार इन दोनों गाँव को बचाने के लिए नदी के दक्षिणी किनारे पर तत्काल बोल्डर का कार्य करना आवश्यक है।