आप खुद ही अनुमान लगा सकते हैं कि जो अस्पताल स्वयं डाक्टर के लिए तरसता हो वहाँ आए मरीजो के इलाज का क्या हाल हो सकता है। इसी तरह बिहार का एक नायाब अस्पताल है नवगछिया का अनुमंडलीय अस्पताल ।
नवगछिया का यह अनुमंडलीय अस्पताल डाक्टर के लिए तरस रहा है। जिसके भरोसे नवगछिया शहर के आम आवाम, अनुमंडल में पदस्थापित अधिकारियों, नवगछिया जेल के कैदियों, राष्ट्रीय उच्च पथ पर होने वाली आकस्मिक दुर्घटनाओं की चिकित्सा की पूरी ज़िम्मेदारी है।
यहाँ पदस्थापित डाक्टर अपनी मर्जी से आते हैं और अपनी मर्जी से जाते हैं । साथ ही ड्यूटी भी अपनी मर्जी से ही कराते और करते हैं। जिसकी वजह से इस अनुमंडलीय अस्पताल का है यह हाल। डाक्टरों की मनमानी का यह आलम तब है जब होली और आम चुनाव जैसा महापर्व सामने है। डाक्टरों की इस स्थिति का खामियाजा कभी भी किसी की जिंदगी से हाथ धोने के साथ भुगतना पद सकता है।
इस अनुमंडलीय अस्पताल का शुक्रवार 14 मार्च को यही नजारा देखने को मिला। जहां सभी पुरुष डाक्टर खुद ही अस्पताल से नदारद थे। जबकि यहाँ पदस्थापित डाक्टर पीबी मिश्रा और डाक्टर एके सिन्हा की ड्यूटी थी। लेकिन इन दोनों का कोई आता पता या कोई सूचना तक नहीं थी। अस्पताल अधीक्षक डॉ बीपी मंडल चुनावी बैठक में भाग लेने भागलपुर चले गये थे।
इस संबंध मे अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ वासुदेव मंडल ने बताया कि सुबह आठ बजे से दिन के दो बजे तक डॉ पीबी मिश्र की ड्यूटी थी। दो बजे से रात्रि के आठ बजे तक डा एके सिंहा की डयुटी थी। दोनो चिक्तिसक बिना किसी सूचना के अस्पताल से गायब रहे। इसकी जानकारी सिविल सर्जन को भी दी जा चुकी है। वही अनुमंडल अस्पताल मे दो अनुबंध के चिकित्सक गोपालपुर पीएससी के चिक्तिसक शाहीद परवेज तथा बिहपुर के चिकित्सक देवेद्र प्रसाद सिंह का का डिप्टेसन भी हुआ हैं। यह डिप्टेशन 12 मार्च को ही हुआ है। किंतु अभी तक किसी भी चिकित्सक ने योगदान नही दिया है।
