- दोपहर 1.30 बजे के बाद हरितालिका तीज के लिए है शुभ मुहूर्त |
- तीज का पारण दूसरे दिन सुबह 5.29 बजे होगा |
- घर में आरती के बाद मूर्ति और शिवलिंग को गंगा में प्रवाहित कर पंडित को दक्षिणा देर किया जाता है पारण |
- शाम 4.38 मिनट के बाद चौथ की तिथि हो जायेगी आरंभ |
- चंद्रमा निकलने पर छत या खुले जगह पर चंद्रमा को अघ्र्य देकर की जाती है पूजा |
- पूजा के बाद दही, फल आदि हाथ में लेकर चंद्रमा को प्रणाम कर किया जाता है उनका दर्शन |
- पंडितों के अनुसार इस दिन बिना हाथ में कोई द्रव्य या फल रखे चंद्रमा का दर्शन है वजिर्त |
पार्वती व महादेव की है पूजा
तीज व्रत तृतीया तिथि में किया जाता है. महिलाएं निर्जला होकर ये व्रत करती हैं. लेकिन इस बार दिन में तृतीया होने के कारण तीज की पूजा दिन में ही होगी. दिन भर शुभ मूहूर्त है. मां पार्वती ने निर्जला रहकर शिव की पूजा की थी.
चंद्रमा को देंगे अघ्र्य
चौथ का व्रत तीज के दूसरे दिन होता है. लेकिन इस बार तिथि एक होने के कारण तीज और चौथ एक ही दिन है. चौथ चंद की पूजा शाम में चांद निकलने के बाद होती है. चांद को अघ्र्य दिया जाता है. दिन भर निर्जला व्रत करने के बाद व्रती चांद को अघ्र्य देती है. फिर पारण होता है.
